नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि ‘डॉ. निमो यादव’ नाम से चल रहे पैरोडी अकाउंट को केंद्र सरकार के आदेश पर ब्लॉक किया गया है। कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार यह कार्रवाई सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर की गई। X ने कहा कि इस अकाउंट पर ऐसे पोस्ट किए गए थे जिन्हें मानहानिकारक माना गया। आरोप है कि अकाउंट ने फोटो, वीडियो और AI आधारित कंटेंट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को गलत तरीके से पेश किया और उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करने की कोशिश की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X द्वारा ‘डॉ. निमो यादव’ नाम के पैरोडी अकाउंट को केंद्र सरकार के निर्देश पर ब्लॉक किए जाने के मामले में याचिका प्रतीक शर्मा ने दायर की है। यह अकाउंट कथित तौर पर प्रतीक शर्मा से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले की सुनवाई जज पुरुषैन्द्र कुमार की अदालत में चल रही है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख अगले हफ्ते निर्धारित की है।
हलफनामे के मुताबिक, X ने अदालत को बताया कि अकाउंट पर पोस्ट की गई सामग्री को मानहानिकारक माना गया और इसमें फोटो, वीडियो और AI आधारित कंटेंट शामिल थे, जिनके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा है कि ‘डॉ. निमो यादव’ नाम के पैरोडी अकाउंट द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट झूठे नैरेटिव फैलाते हैं, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। हलफनामे में बताया गया कि अकाउंट को आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत ब्लॉक किया गया। इस नियम के तहत, नोडल अधिकारियों के अनुरोध के बाद संबंधित कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने का आदेश जारी किया जा सकता है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि अकाउंट चलाने वाले व्यक्ति की पहचान और संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सत्यापित जानकारी नहीं मिल सकी।
X ने उठाए सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के आदेश पर ‘डॉ. निमो यादव’ सहित 12 अकाउंट्स को ब्लॉक किए जाने पर आपत्ति जताई है। कंपनी ने कहा कि ज्यादातर कंटेंट आईटी एक्ट की धारा 69A के दायरे में नहीं आता और पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना अत्यधिक और असंगत कदम है। X ने अदालत में यह तर्क दिया कि पोस्ट-लेवल ब्लॉकिंग करना एक बेहतर और कम हस्तक्षेप करने वाला विकल्प हो सकता था, जिससे केवल विवादित कंटेंट ही हटाया जाता और अकाउंट पूरी तरह अवरुद्ध नहीं होता।
सुनवाई का मौका नहीं देने का आरोप
कंपनी ने तर्क दिया कि अकाउंट धारकों को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का मूल हिस्सा है। X ने यह भी कहा कि पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक रोक है। कंपनी का सुझाव है कि केवल विवादित पोस्ट को ब्लॉक करना अधिक उपयुक्त और संवैधानिक तरीका होता। मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी, जिसमें अदालत दोनों पक्षों के तर्कों और हलफनामों की विस्तृत समीक्षा करेगी।
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