नई दिल्ली: CM रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की 35वीं बोर्ड बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनहित से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी के गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत देने के लिए अटल कैंटीन के भोजन परोसने के समय का विस्तार किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। अटल कैंटीन के समय में बदलाव, ताकि ज्यादा लोगों को भोजन मिल सके, गिग वर्कर्स (डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर आदि) के लिए विश्राम केंद्र बनाए जाएंगे, 717 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों को घर उपलब्ध कराने का निर्णय. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग, खासकर गरीब और श्रमिक वर्ग को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। गिग वर्कर्स के लिए बनाए जाने वाले विश्राम केंद्रों से उन्हें काम के दौरान आराम और बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब दिल्ली के लोगों को कम दाम में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने वाली अटल कैंटीनें पहले से ज्यादा समय तक खुली रहेंगी, ताकि अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। सुबह (लंच): अब 11:30 बजे की बजाय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक , शाम (डिनर): अब 6:30 बजे की बजाय शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक बफर टाइम: सर्विस शुरू होने से पहले 30 मिनट का अतिरिक्त समय सरकार का मानना है कि समय में इस बदलाव से खासकर कामकाजी और जरूरतमंद लोगों को ज्यादा सुविधा मिलेगी। जो लोग पहले समय की वजह से भोजन नहीं ले पाते थे, अब वे भी आसानी से अटल कैंटीन की सेवा का लाभ उठा सकेंगे।

कैंटीनों और वितरण केंद्रों का होगा पुनर्गठन

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में संचालित लगभग 100 मौजूदा अटल कैंटीनों और वितरण केंद्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है। कैंटीन संचालन में सुधार के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी संबंधित एजेंसियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) से जुड़े डेटा को अधिकतम एक महीने तक ही सुरक्षित रखने का प्रावधान किया जाएगा सरकार का कहना है कि इन बदलावों से न केवल सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

गिग वर्कर्स के लिए बनेंगे रेस्टिंग सेंटर्स

मुख्यमंत्री ने बताया कि गिग वर्कर्स जैसे डिलीवरी बॉय, कूरियर पार्टनर और दिहाड़ी मजदूरों के लिए विशेष आराम केंद्र और सार्वजनिक उपयोगिता केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों को अटल कैंटीन के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि एक ही स्थान पर भोजन, आराम और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। सरकार का लक्ष्य ऐसे केंद्र विकसित करना है जहां कामकाजी लोग सस्ती दर पर भोजन कर सकें , आराम कर सकें, बुनियादी सुविधाओं का उपयोग कर सकें इससे खासकर लंबे समय तक काम करने वाले गिग वर्कर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि शहर के विभिन्न हिस्सों में यूरिनल (लघुशंका) केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों को उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।

717 झुग्गीवासियों को मिलेगा अपना घर

रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की 35वीं बैठक में झुग्गीवासियों के पुनर्वास को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। बोर्ड ने सेवडा-घेवरा इलाके में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैटों के आवंटन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DID कैंप जैसे झुग्गी-झोपड़ी समूहों के 717 लाभार्थियों को फ्लैट दिए जाएंगे। इसके अलावा पहले से मंजूर किए गए इंदिरा कैंप (कल्याणपुरी), G-पॉइंट (गोल मार्केट), न्यू संजय कैंप (ओखला) और राजीव कैंप (मंडावली) के 221 लाभार्थियों को भी इसी इलाके में आवास आवंटित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कई इलाकों में मरम्मत से जुड़े कामों को दी गई मंजूरी

जहां पुनर्वास और सामाजिक योजनाओं पर फैसले लिए गए, वहीं बुनियादी ढांचे और मरम्मत से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य राजधानी में लोगों के रहने की स्थिति को बेहतर बनाना और शहरी सुविधाओं को मजबूत करना है। सुल्तानपुरी में EWS फ्लैटों की मरम्मत और सुधार द्वारका सेक्टर 16-B में बने पुराने फ्लैट्स को रहने योग्य बनाने का कार्य भलस्वा क्षेत्र में सड़क, पार्क और सीवर सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं के पूरा होने से हजारों लोगों को बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं मिलेंगी। खासकर EWS फ्लैटों की मरम्मत और पुनर्विकास से वहां रहने वाले परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

सालभर में किए कामों का लेखा-जोखा मांगा

मुख्यमंत्री ने DUSIB को निर्देश दिया कि पिछले एक साल में किए गए कार्यों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इस रिपोर्ट के जरिए योजनाओं के असर का आकलन किया जाएगा, प्रगति की समीक्षा होगी और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य कमजोर वर्गों तक इनका वास्तविक लाभ पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ योजनाएं शुरू करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वे जमीनी स्तर पर असल बदलाव लाएं।”

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