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हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कहा कि उसने 2,000 करोड़ रुपये के सिक्योरिटीज घोटाले के सिलसिले में कार्वी समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सी. पार्थसारथी और सीएफओ जी. हरि कृष्णा को गिरफ्तार किया है। पार्थसारथी और जी. हरि दोनों को संबंधित अदालत ने चार दिनों की ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कोमांदूर पार्थसारथी और कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जी. हरि का अब आमना-सामना होगा। ईडी द्वारा जब्त किए गए कई दस्तावेजों के साथ भी उनका सामना भी कराया जाएगा। एजेंसी को पहले पार्थसारथी की पांच दिन की हिरासत मिली थी। वह उस समय बेंगलुरु जेल में बंद थे और एक कैदी ट्रांजिट वारंट पर उन्हें चांडलगुडा जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

शुरूआत में, हैदराबाद सेंट्रल क्राइम स्टेशन (सीसीएस) पुलिस ने उनके और फर्म के खिलाफ पांच मामले दर्ज किए थे। इंडसइंड बैंक और एचडीएफसी बैंक ने आरोप लगाया था कि केएसबीएल ने अपने ग्राहक की प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) को गिरवी रखकर और ऋण राशि को डायवर्ट करके ऋण धोखाधड़ी की है। ईडी ने हैदराबाद पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

हैदराबाद सीसीएस पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। ईडी ने पीएमएलए जांच शुरू करने के बाद, मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के लिए चार्जशीट और अन्य संबंधित दस्तावेजों की एक प्रति ली। ईडी ने अपने मामले को मजबूत बनाने के लिए आयकर, आरबीआई, सेबी और एनएसई की रिपोर्ट भी ली।

यह आरोप लगाया गया है कि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) प्रबंधन ने कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी की है। केएसबीएल ने कथित तौर पर कई खातों में 550 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।

इंडसइंड बैंक ने केएसबीएल को सिक्योरिटीज, शेयरों और व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर 137 करोड़ रुपये का ऋण दिया। गारंटर में से एक केएसबीएल के अध्यक्ष सी. पार्थसारथी थे। उन्होंने इस तथ्य को दबा दिया कि गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज ग्राहकों की हैं।

सभी सिक्योरिटीज को केएसबीएल के डीमैट खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था और इंडसइंड बैंक के समक्ष उनके व्यवसायों में मार्जिन और अल्पकालिक आवश्यकता के लिए गिरवी रखा गया था।

एचडीएफसी बैंक ने यह भी आरोप लगाया है कि केएसबीएल ने अपने ग्राहकों की सिक्योरिटीज को अवैध रूप से गिरवी रखकर 329 करोड़ रुपये का ऋण लिया। बाद में उन्होंने केस ट्रांसफर कर दिया।

ईडी को जांच के दौरान यह भी पता चला कि 2016 और 2019 के बीच, केएसबीएल ने कथित तौर पर कार्वी रियल्टी कंपनी को 1,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।

पिछले साल सितंबर में ईडी ने केएसबीएल के अलग-अलग पतों पर छापेमारी की थी। ईडी ने कार्वी ग्रुप के शेयर भी फ्रीज कर दिए थे।
ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज जुटाए हैं और वह अभी भी मामले की जांच कर रही है।

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