पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दी नसीहत, मुख्यमंत्री संघीय ढांचे का सम्मान कर बनाएं समन्वय, विरोध के लिए विरोध करने के बचें…

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब ओछी राजनीति छोड़कर देश व प्रदेश के हित को सर्वोपरि मानकर काम करने की नसीहत दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल को संघीय ढाँचे का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा. साथ ही हर मामले में ‘विरोध के लिए विरोध’ की मानसिकता त्यागकर अनर्गल राजनीतिक प्रलाप से बचने की सलाह देते हुए कहा कि यही उनके पद की गरिमा के अनुकूल राजनीतिक आचरण का तकाजा है.

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के निवेदन पर हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित आठ में से पांच कोल ब्लॉक की नीलामी रोकने की घोषणा करके केंद्र सरकार ने जिस तरह छत्तीसगढ़ के हितों को ध्यान में रखने के उदार दृष्टिकोण का परिचय दिया है, मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आचरण से यह सीख हृदयंगम कर लेना चाहिए.

डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने अपने पूरे कार्यकाल में राजनीतिक प्रतिशोध, झूठी वाहवाही कराके अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनने और अनर्गल प्रलाप की जो मिसाल पेश की है, उससे परे होकर अब राज्य के हित को सामने रखकर उन्हें केंद्र के साथ मिलकर काम करने का अभ्यास करना चाहिए. इस मामले में उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी सीख ले लेनी चाहिए जो गंभीर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कुछ विषयों पर केंद्र सरकार के निर्णयों की सराहना करने में ज़रा भी कृपणता नहीं दिखाते.

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने कोरोना संकट के मद्देनज़र ग़रीबों को तीन माह के लिए मुफ़्त राशन देने की मांग केंद्र सरकार से की और केंद्र सरकार ने पाँच माह तक मुफ़्त राशन देने की घोषणा की है, अब यह प्रदेश सरकार की नाकामी है कि न तो वह पूरा राशन तक उठा पा रही है और न ही गरीबों को उसका समय पर वितरण करा पा रही है.

राज्य की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान राष्ट्रीयअंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ज़्यादा रहता है. क्या उन्हें अपनी कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की राजनीतिक समझ पर संदेह है? डॉ. सिंह ने कहा कि चाहे कश्मीर का मुद्दा रहा हो या राफेल विमान सौदे का या फिर चीन के साथ विवाद का, मुख्यमंत्री के इन विषयों पर बयानों से यही प्रतिध्वनित होता रहा है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के हित में प्रदेश सरकार की बातों को चाहे जितनी संज़ीदगी से ले, प्रदेश के कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री मिलकर जिस तरह ‘मोदी विरोध’का एजेंडा चला रहे हैं, वह राजनीतिक कृतघ्नता की शर्मनाक मिसाल है.

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