आशुतोष तिवारी, बस्तर। बस्तर जिले के करपावंड रेंज के अंतर्गत मोखागांव के जंगलों में जब शनिवार को भीषण आग की लपटें उठीं, तो उन्हें बुझाने के लिए सरकारी अमले के साथ दो ऐसे जांबाज भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए, जिनकी उम्र अभी खेलने-कूदने की है। धनपुर गांव के रहने वाले 8 वर्षीय मुना और 10 वर्षीय तिलक ने जंगल को जलता देख न केवल साहस का परिचय दिया, बल्कि अपनी सूझबूझ से वन विभाग के कर्मचारियों को भी हैरत में डाल दिया।


जैसे ही इन बच्चों ने जंगल में आग की लपटें देखीं, उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट या सरकारी आदेश के इंतजार किए स्वप्रेरित होकर आग बुझाने के काम में जुट गए। वन अमले और बच्चों के संयुक्त प्रयास से बेहद कम समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों की जमकर सराहना की है।

बता दें कि गर्मी के दौरान वनों से आच्छादित बस्तर में आग लगने के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। आग पर काबू करने के लिए जमीनी स्तर पर वन अमले को तैनात किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की सक्रियता बस्तर के जंगलों को दावानल से बचाने का काम करती है।
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