कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया है, जिसके बाद ग्वालियर कलेक्टर द्वारा भी जिले के सभी सरकारी छात्रावास और सरकारी अस्पतालों में आरओ वाटर प्यूरीफायर लगाने, जहाँ लगे हुए है वहाँ तत्काल साफ सफाई करने के निर्देश बीते सोमवार को जारी किये थे। 

साफ स्वस्छ पानी आज सभी पीना चाहते है। इंदौर घटना ने सबको बड़ा और कड़ा सबक सिखाया है,जिले के जिम्मेदार भी नींद से जागे है।यही वजह है कि ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने बैठक कर बीते सोमवार को साफ पानी को लेकर सख्त और जरूरी निर्देश दिए। जिसके तहत जिले के सभी सरकारी छात्रावासो और अस्पतालों में साफ पानी की व्यवस्था दुरुस्त की जाना तय किया। उन्होंने साफ साफ कहा कि….

  • – जिले के सभी शासकीय अस्पतालों ,छात्रावासों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में कोई ढ़िलाई न हो।
  • – संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने आरओ (वाटर प्यूरीफायर) बदलने का काम भी साथ-साथ में किया जाए
  • – सबंधित जगहों पर पेयजल स्त्रोतों के पानी की जांच और क्लोरीनेशन भी लगातार करते रहें
  • – जिन छात्रावासों में पेयजल लाइन से जल आपूर्ति होती है उन पेयजल लाइनों का भी बारीकी से निरीक्षण कराया जाए
  • – कलेक्टर ने पानी की टंकियों की साफ-सफाई निर्धारित शेड्यूल के तहत कराने पर भी विशेष जोर दिया

कलेक्टर के निर्देश के 48 घण्टे गुजरने के बाद भी क्या हालत सुधरे या जस के तस दिखे,वो बहुत महत्वपूर्ण हैं,ऐसे में इस हकीकत को जानने हमारे संवाददाता कर्ण मिश्रा ने छात्रावासों और अस्पतालों का ग्राउंड ज़ीरो पर जायजा लिया। जहां साफ साफ समझ मे आया कि इस गंभीर मसले के मामले में शासन और प्रशासन के निर्देशो को अधिकारी अमल में ही अभी तक नही लाये है,जबकि निर्देश के तहत तत्काल कार्रवाई में जुटना था। देखिये अलग अलग जगह की तस्वीरे क्या बयां कर रही है।

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यहाँ रहने वाले छात्र छात्राओ की पीने के पानी की व्यवस्था को देखा तो मौके पर पानी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप मिली। टैंकर के जरिये पानी की जुगाड़ प्रबन्धन द्वारा की गई,अपनी प्यास बुझाने कोई छात्र साफ पानी की व्यवस्था करने के लिए खाली बोतल लिए घूमता दिखा तो कुछ छात्र तो सीधे टैंकर से ही पानी पीते नजर आए। जब मौके पर मौजूद कर्मचारियों से चर्चा की तो बिना कैमरे के सामने आए उन्होंने बताया कि कैम्पस की मोटर खराब हो गयी है,जिसके चलते टैंकर के पानी से काम चल रहा है,वहीं अंदर लगे आरओ की तस्वीर कैमरे में कैद करने से पहले ही रोक दिया गया।

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देखने,सुनने और बोलने में अक्षम छात्रों के लिए चमचमाती बिल्डिंग तो यहाँ दिखी,जब अंदर जाकर देखा गया तो वाटर कूलर के साथ आरओ भी लगा पाया। लेकिन आसपास मौजूद गन्दगी के साथ ही पानी के एक बूंद भी मौजूद न होने से साफ समझ आया कि आरओ वाटर प्यूरीफायर का उपयोग ही नही हो रहा। वहाँ रहने वाले छात्र सादा पानी पीकर ही काम चला रहे है। बोलने में अक्षम छात्रों ने पानी सहित साफ सफाई की समस्या को इशारों में कैमरे के सामने आए बिना बताने की कोशिस भी की।

जिला अस्पताल मुरार

अंचल के सबसे बड़े शासकीय जयारोग्य अस्पताल के बाद जिला अस्पताल मुरार पर स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा दबाब रहता है,हर दिन हजारों मरीज और उनके अटेंडर यहाँ पहुंचते है। जब कैम्पस में पानी की व्यवस्था का जायजा लिया तो पाया कि मौके पर वाटर कूलर तो लगा है, लेकिन इसमे आरओ वाटर प्यूरीफायर नही लगा है। सबसे ज्यादा व्यवस्था और रखरखाव की पोल तब खुली जब हमारे संवाददाता कर्ण मिश्रा ने वाटरकूलर का ऊपर से ढक्कन खोला। नीचे लोग नल से पानी पीते दिखे तो अंदर कीड़े और गन्दगी का अंबार दिखा। अस्पताल में लोग स्वास्थ्य लाभ लेने आते है,वहाँ आंखे बंद कर लोग मरे और जिंदा कीड़े मकौड़े की मौजूदगी वाला पानी पीने मजबूर दिखे।  

बहरहाल सिस्टम की व्यवस्थाओ की चौखट पर कुछ जगह के ऐसे हालात दिखे तो समझिए जनाब और जगहों पर भी कैसा सूरतेहाल होगा। उम्मीद करते है कि इंदौर घटना से कड़ा सबक लेते हुए सिर्फ निर्देश ही नही धरातल पर उनका पालन भी दिखेगा।

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