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Exclusive: दमोह धर्मांतरण मामले में एक और बड़ा खुलासा, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष पर गिर सकती है गाज, इधर धर्मांतरण रोकने संघ कर रहा ऑडिट

अमृतांशी जोशी/राकेश चतुर्वेदी,भोपाल। मध्यप्रदेश के दमोह जिले के धर्मांतरण मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष पर भी गाज गिर सकती है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ही जांच को लेकर सारी जानकारी लीक कर रहे थे। राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग के औचक निरीक्षण की जानकारी लीक करने की बातें लिखी गई है। मिड इंडिया क्रिश्चियन सर्विसेज की वेबसाइट की भी साइबर फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

10 दिन के अंदर मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के आदेश जारी किए गए है। कलेक्टर और दमोह एसपी से एक्शन टेकन की रिपोर्ट मांगी गई है। मिड इंडिया क्रिशन सर्विसेस में रह रहे बच्चों की परिवार की बैकग्राउंड रिपोर्ट भी मांगी गई। सभी बच्चों की रजिस्ट्रेशन डॉक्युमेंट्स भी मांगे गए। संस्थान में काम करने वाले सारे एम्प्लॉई की पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट, एससी बच्चों और उनके घर परिवार वालों के भी पूरे रिकॉर्ड मांगे गए। जिन बच्चों ने अपने घर छोड़े हैं उनके भी पिछले रिकॉर्ड मांगे गए। पैरेंट संस्थान और उससे जुड़े हुए सारे संस्थानों की भी जानकारी तलब की गई है।

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प्रतीकात्मक फोटो

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धर्मांतरण रोकने के लिए संघ ऑडिट कर रहा है। मप्र के आदिवासी इलाकों में संचालित गतिविधियों की ऑडिट के लिए संघ से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे। संस्कार केंद्र कार्य अवलोकन अभियान के तहत पदाधिकारी पहुंचे। मध्य भारत प्रांत के जिलों में अभियान चला। 48 घंटे तक गांवों में ठहरे पदाधिकारी। आदिवासी इलाकों की जमीनी रिपोर्ट तैयार हो रही। धर्म जागरण, सामाजिक समरसता और शैक्षणिक गतिविधियों की रिपोर्ट, हिंदू त्योहारों पर गांव का माहौल और स्वच्छता के कामकाज की भी रिपोर्ट, संघ पदाधिकारियों के फीडबैक पर विद्या भारती रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर धर्मांतरण रोकने के लिए आध्यात्मिक जागरण का रोडमैप तैयार होगा। मध्यप्रदेश के तीनों प्रांतों में 1500 से अधिक जनजातीय संस्कार केंद्र संचालित हैं। मध्य भारत प्रांत में 456 संस्कार केंद्र संचालित हैं।

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