सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ 25 साल का हो गया है. आबादी तीन करोड़ से ज्यादा हो गई है, लेकिन शुरुआती दौर से स्वीकृत डॉक्टरों के पद आज भी खाली हैं, जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बढ़ते मरीजों के बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की भारी कमी ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है. राजधानी रायपुर के दो प्रमुख सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर और दाऊ कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी से पिछले दो सालों में लगभग 100 विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है. लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे ये डॉक्टर नियमितीकरण न होने से निराश होकर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद तीन गुना खाली है. साथ ही चिकित्सा अधिकारियों की हालात संविदा पर टिकी है.
विभागीय सूत्रों और विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक इन दोनों अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अब चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है. सालों तक मरीजों की सेवा करने के बावजूद जब स्थायी नौकरी और पदोन्नति का रास्ता बंद है तो डॉक्टर निजी क्षेत्र या पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश का रुख कर रहे हैं.

आधे से ज्यादा पद खाली, चरमरा रही व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में विशेषज्ञ चिकित्सकों की 1773 स्वीकृत पदों में से 1418 पद अभी भी खाली पड़े हैं. यानी तीन तिहाई से ज्यादा पदों पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं. वहीं चिकित्सा अधिकारियों के लिए प्रदेश में 2696 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 305 पद खाली हैं. इस तरह इस नियमित भर्तियां लगभग बंद हैं, जबकि केवल संविदा नियुक्तियां हो रही हैं. इससे अनुभवी डॉक्टर टिक नहीं पा रहे. पूरे प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय को मिलाकर चिकित्सा विशेषज्ञ के लिए 1773 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 320 नियमित विशेषज्ञ कार्यरत हैं. संविदा में 35 हैं, इस तरह 1418 पद ख़ाली है. वहीं चिकित्सा अधिकारी के लिए सभी जिलों में 2296 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 1774 नियमित चिकित्सा अधिकारी हैं, 780 संविदा में हैं. 305 पद रिक्त हैं. साथ ही दंत चिकित्सक के लिए प्रदेशभर में 149 पद स्वीकृत हैं. 98 नियमित भरा हुआ है. 51 पद ख़ाली है.
जानिए कहां कितने पद स्वीकृत और खाली
- रायपुर में चिकित्सा विशेषज्ञ 58 पोस्ट स्वीकृत हैं और नियमित में 22 कार्यरत हैं, संविदा में चार हैं. इस तरह 32 पद रिक्त हैं.
- चिकित्सा अधिकारियों के लिए 108 पद स्वीकृत हैं, जिसमें नियमित 68 भरा हुआ है. वहीं 26 संविदा में हैं. इस तरह 14 पद रिक्त हैं.
- बलौदाबाज़ार में चिकित्सा विशेषज्ञ के लिए 55 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 10 नियमित भरा हुआ है. संविदा में तीन हैं. इस तरह 42 पद रिक्त हैं.
- चिकित्सा अधिकारियों के लिए 66 पद स्वीकृत हैं, 39 नियमित हैं, 25 संविदा कर्मी हैं, दो पद रिक्त हैं.
- सुकमा जिला एक ऐसा जिला है, जहां महज विशेषज्ञ चिकित्सक के 32 पद स्वीकृत है, लेकिन दुर्भाग्य है कि सभी पद ख़ाली है यानी कि सुकमा में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है.
- वहीं बीजापुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए 62 पद स्वीकृत हैं. एक नियमित और दो संविदा विशेषज्ञ हैं. इस तरह 59 पद ख़ाली हैं।
- जशपुर में 76 पद विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए स्वीकृत हैं. इनमें 18 नियमित पद भरा हुआ है. इस तरह 58 पद ख़ाली हैं.
- जिला मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 76 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 10 नियमित विशेषज्ञ कार्यरत हैं. इस तरह 66 पद खाली है. चिकित्सा अधिकारियों के लिए 83 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 11 नियमित और 29 संविदा होने के बाद 43 पद खाली हैं.
डॉ. राकेश गुप्ता अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया ने कहा, प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अलग कैडर नहीं है और सुविधाओं की भारी कमी है. विभाग कई बार इंटरव्यू आयोजित कर चुका है, लेकिन डॉक्टर सरकारी सेवा में आने को तैयार नहीं हो रहे. ऐसा नहीं है कि डॉक्टरों की कमी है. लगभग 3 हज़ार हर साल प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर निकल रहे हैं. वहीं बाहर से एक हज़ार लगभग डॉक्टर पढ़कर आ रहे हैं. लगभग 4000 डॉक्टर छत्तीसगढ़ में तैया रहे हैं, लेकिन भर्तियां नहीं हो रही है.
डॉ. हीरा सिंह लोधी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने भी चिंता जताते हुए कहा, नियमितीकरण की मांग लंबे समय से की जा रही है. प्रशासनिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही, जिससे डॉक्टरों में गहरी निराशा फैल गई है. अस्थायी नौकरी की अनिश्चितता से तंग आकर कई डॉक्टर अब निजी अस्पतालों में बेहतर वेतन और सुविधाओं के लिए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में डॉक्टर छत्तीसगढ़ छोड़कर मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं, जहां स्वास्थ्य विभाग नियमित भर्तियां लगातार कर रहा है और नौकरी की सुरक्षा भी सुनिश्चित है.
मरीजों पर सबसे बड़ा असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब मरीजों को उठाना पड़ रहा है. बस्तर, सरगुजा जैसे दूरदराज के इलाकों से रायपुर आने वाले मरीजों को जांच के लिए विभागों के बाहर लंबी कतारें और ऑपरेशन के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है. जो मरीज निजी अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते उन्हें बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है.
बढ़ता काम का बोझ और गहराता संकट
खाली पदों के कारण मौजूदा डॉक्टरों पर काम का बोझ पहले से दोगुना हो गया है. अगर स्वास्थ्य विभाग तुरंत नियमित भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं करता तो आने वाले दिनों में सरकारी अस्पतालों में इलाज का संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है. समय पर इलाज नहीं मिलने और डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को सफ़र करना पड़ रहा है.
लगातार विशेषज्ञ डॉक्टरों की आपूर्ति की जा रही : स्वास्थ्य मंत्री
इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, जब से मैंने स्वास्थ्य विभाग का दायित्व संभाला है लगातार विशेषज्ञ डॉक्टरों की आपूर्ति की जा रही है. संविदा में भर्ती कर रहे हैं. साथ ही 300 पदों में भर्ती जारी है. आगे और भी भर्तियां होंगी. प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य को लेकर कोई खिलवाड़ नहीं होगा.

