नितिन नामदेव, रायपुर। राजधानी रायपुर में खेल सुविधाओं की बदहाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है. खारुन नदी में महादेव घाट के पास बने गहरे एनीकट में जान जोखिम में डालकर तैराकी की प्रैक्टिस करते बच्चों की तस्वीरें और हालात सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रहे हैं. यह तस्वीर हैरान करने वाली है, मगर ये खिलाड़ियों की मजबूरी है. यहां जान जोखिम में डालकर प्रैक्टिस कर रहे हैं, जबकि उसी स्थान को पहले से ही संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्र घोषित किया जा चुका है.
महादेव घाट के इस एनीकट के पास ही नगर निगम का फिल्टर प्लांट भी स्थित ह,. जहां पूर्व में नहाने आए नागरिकों के डूबने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. इन हादसों को देखते हुए निगम ने चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं. बावजूद इसके यहां खुलेआम बच्चों की तैराकी प्रैक्टिस कराई जा रही है. ट्राइबल गेम्स की प्रतियोगिता जारी है और ओपन स्विमिंग अगले महीने होने है. प्रतियोगिता सिर पर है और बच्चे जिस नगर निगम के स्वामिंग पुल में प्रैक्टिस करते है उसे मेंटेनेंस के चलते बंद कर दिया गया है. मजबूरन खिलाड़ियों और कोच को यह जोखिम भरा कदम उठाना पड़ रहा है.


अनहोनी की जिम्मेदारी पर कोच खामोश
कोच प्रमोद फरिकार का तर्क है कि स्विमिंग पूल मरम्मत के कारण बंद है और राष्ट्रीय प्रतियोगिता नजदीक होने की वजह से बच्चों को मजबूरी में नदी लाया गया. हालांकि गहरे पानी में किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी पर कोच खामोश नजर आए. उनका कहना सिर्फ इतना था कि बच्चे तैराकी में दक्ष हैं और उनके साथ पैरेंट्स भी मौजूद हैं।

बच्चों ने कहा – डर लगता है, लेकिन मजबूरी है…
नदी में अभ्यास कर रहे बच्चों के पैरेंट्स ने खुद हालात को खतरनाक बताया. उनका कहना है कि स्विमिंग पूल और नदी में जमीन-आसमान का अंतर है. नदी के बहाव में सांस तेजी से फूलती है. पानी गंदा है, नुकीले पत्थर हैं. फिसलन भरी जगहें हैं और कई स्थानों पर मछली पकड़ने के जाल भी लगे हुए हैं. वहीं एनीकट में प्रैक्टिस कर रहे बच्चों ने साफ कहा, यहां डर लगता है, लेकिन मजबूरी है. बच्चों के माता-पिता का गुस्सा और चिंता दोनों साफ नजर आई. उनका यह भी कहना है कि राजधानी रायपुर में बच्चों को नदी में प्रैक्टिस करनी पड़ रही है, यह बेहद शर्मनाक है. स्विमिंग पूल ठीक नहीं होने की वजह से बच्चों की जान जोखिम में है इसलिए वे खुद भी नदी तक आने को मजबूर हैं।

मेंटनेंस का काम जल्द पूरा हो जाएगा : महापौर
स्विमिंग पूल कर्मचारियों के अनुसार 22 दिसंबर से मेंटेनेंस कार्य चल रहा है, लेकिन पिछले 5 दिनों से ठेकेदार साइट पर नहीं पहुंचा. टाइल्स, पाइप फिटिंग, सफाई और पानी की शुद्धता जैसे कई काम बाकी हैं. सही तरीके से काम हुआ तो कम से कम एक महीने का वक्त और लगेगा. इस पूल पर रोजाना 500 से 700 बच्चे निर्भर हैं. इस मामले में महापौर मीनल चौबे ने भी कहा कि बच्चों के लिए स्विमिंग पूल है. वे वहां स्विमिंग करें. थोड़ा मेंटनेंस का काम है. वह जल्द समाप्त हो जाएगा.
सवाल साफ है… क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा या बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था और स्विमिंग पूल मरम्मत में तेजी लाई जाएगी?
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