Delhi: दिल्ली में फर्जी फार्मेसी रजिस्ट्रेशन गिरोह का एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने भंडाफोड़ किया है. इस मामले में दिल्ली फार्मेसी काउंसिल के 1 पूर्व रजिस्ट्रार, क्लर्क, दलाल, प्रिंटिंग शॉप मालिक, फार्मेसी कॉलेज के कर्मचारी और अवैध फार्मासिस्ट समेत 46 लोगों की गिरफ्तारी की गई. यह फर्जी दस्तावेजों के आधार फार्मासिस्टों की फर्जी रजिस्ट्रेशन करते थे. 4928 पंजीकरणों में से 35 अवैध पाए गए हैं.
राजधानी दिल्ली में झोला छाप डॉक्टर ही नहीं बल्कि केमिस्ट भी झोलाछाप है. जो बिना फार्मेसी का कोर्स किए दवाइयां देने का काम के रहे थे. राजधानी दिल्ली में चलने वाले हजारों केमिस्टों में से बहुत बड़ी संख्या में केमिस्ट फेक रजिस्ट्रेशन के आधार पर चल रहे हैं दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने एक ऐसे बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है जो बड़ी संख्या में लोगों को बिना किसी कोर्स के केमिस्ट के लिए फेक रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराते थे.
इस मामले में पुलिस ने एक फार्मर रजिस्टर के अलावा एक क्लर्क फार्मासिस्ट इंस्टीट्यूशन से जुड़े हुए तीन लोग के साथ ही साथ 35 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जो इसी फेक रजिस्ट्रेशन के आधार पर दिल्ली में जगह-जगह केमिस्ट खोल कर बैठे थे. इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने 6 दलालों को भी गिरफ्तार किया है. जिनका काम था पूर्व रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह और उनके लोगों तक ऐसे लोगों को पहुंचना जो नकली डॉक्यूमेंट के आधार पर फार्मासिस्ट के लिए सर्टिफिकेट पाना चाहते थे.
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दरअसल पिछले साल 30 जनवरी को एंटी करप्शन ब्रांच को एक कंप्लेंट मिली दिल्ली सरकार के हेल्थ एंड वेलफेयर डिपार्टमेंट की तरफ से के उसे दौरान के जो रजिस्ट्रार हैं उन्होंने बड़ी संख्या में फेक रजिस्ट्रेशन किए हैं फार्मासिस्ट के जिसके आधार पर एंटी करप्शन ब्रांच ने अपनी जांच शुरू की.
जांच के दौरान एंटी करप्शन ब्रांच को पता चला कि कुलदीप सिंह ने ऐसी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन किया जिनके डॉक्युमेंट्स ऑनलाइन अपलोड किए जाते थे और बिना किसी वेरिफिकेशन के उनको फार्मासिस्ट की रजिस्ट्रेशन के लिए सर्टिफिकेट दे दिया जाता था जो डॉक्यूमेंट ऑनलाइन अपलोड किए जाते थे उनको वेरीफाई करने के लिए बाकायदा जो फार्मासिस्ट इंस्टीट्यूशन है उससे जुड़े हुए तीन लोग उन डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन ही वेरीफाई कर दिया करते थे बिना किसी ठोस जांच के पूरा गोरख धंधा चल रहा था और इसके लिए बाकायदा मोटी रकम वसूली जाती थी.
दिल्ली फार्मेसी काउंसिल से जुड़े हुए पूर्व रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान तकरीबन 5000 लोगों को फार्मासिस्ट के लिए सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाई अब एंटी करप्शन ब्रांच उन सभी सर्टिफिकेट की जांच कर रही है क्या सभी के सभी फेक दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए थे. अब तक सिर्फ 100 फार्मासिस्ट के दस्तावेजों की या सर्टिफिकेट की जांच की गई जिनमें से 35 फेक पाए गए जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. ,
इन 35 नकली फार्मासिस्ट के अलावा पुलिस ने 6 टाउट यानी कि छे दलाल इसके अलावा कुलदीप सिंह जो उसे समय के रजिस्ट्रार थे के साथ-साथ एक क्लर्क और साथ ही साथ एक फार्मासिस्ट इंस्टीट्यूशन से जुड़े हुए तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है.
एसीबी ने दिल्ली फार्मेसी काउंसिल (डीपीसी) के 1 पूर्व रजिस्ट्रार और 01 क्लर्क, 06 दलालों, 01 प्रिंटिंग शॉप मालिकों, फार्मेसी कॉलेजों के 03 कर्मचारियों और 35 अवैध फार्मासिस्टों को गिरफ्तार किया है, जबकि दिल्ली में चल रहे एक बड़े धोखाधड़ी वाले फार्मेसी पंजीकरण घोटाले का पर्दाफाश किया है.
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एसीबी के मुताबिक एक बड़ी जांच से पता चला है कि दिल्ली फार्मेसी काउंसिल (डीपीसी) के पूर्व रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कई फार्मासिस्टों के पंजीकरण को अवैध रूप से मंजूरी दी. यह घोटाला एक निजी फर्म (वीएमसी) के माध्यम से किया गया था, जिसे उचित टेंडर प्रक्रिया के बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
कुलदीप सिंह, तत्कालीन रजिस्ट्रार, दिल्ली फार्मेसी काउंसिल के खिलाफ फर्जी/जाली दस्तावेजों के आधार पर फार्मासिस्ट के रूप में 3 उम्मीदवारों के पंजीकरण को अवैध मंजूरी देने के संबंध में शिकायत दर्ज की गई थी। मामले की विस्तृत जांच के बाद तत्कालीन रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह के खिलाफ जांच के लिए पीओसी अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने का प्रस्ताव जीएनसीटीडी के सतर्कता निदेशालय को भेजा गया था.
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