हरियाणा-पंजाब स्थित खनौरी बॉर्डर को आज से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इससे जिंद-संगरूर मार्ग से दिल्ली और पटियाला के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। शंभू बॉर्डर की दोनों लेन पहले ही गुरुवार को खोल दी गई थीं, जिससे पंजाब से हरियाणा और दिल्ली जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण ये दोनों बॉर्डर 13 महीनों तक बंद रहे।

शंभू और खनौरी बॉर्डर खुलने के बाद, हरियाणा पुलिस ने दिल्ली से सटे कुंडली बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड्स भी हटा दिए हैं। इसके साथ ही, पुलिस ने किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के संयोजक सरवन सिंह पंधेर और उनके साथियों को जेल भेज दिया है। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत डल्लेवाल ने इलाज करवाने से इनकार कर दिया है, और जालंधर में डॉक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां आज संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं के साथ बैठक करेंगे।

MSP की गारंटी पर अड़े किसान

किसान अपनी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर 12 फरवरी 2024 को दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे। इस बीच, हरियाणा पुलिस ने उन्हें अंबाला-पटियाला के बीच शंभू बॉर्डर और संगरूर-जिंद के बीच खनौरी बॉर्डर पर रोक लिया। पुलिस ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे नाराज किसानों ने वहीं धरना देना शुरू कर दिया और दिल्ली जाने की मांग पर अड़े रहे।

स्थिति को देखते हुए, हरियाणा पुलिस ने दोनों बॉर्डरों पर कंक्रीट बैरिकेड्स लगा दिए। वहीं, पंजाब की ओर से किसानों ने एक शेड बनाया और वहीं बैठ गए। इस दौरान बैरिकेडिंग के पास हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

केंद्र सरकार भी इस किसान आंदोलन को लेकर पहले से सक्रिय थी। किसानों के साथ पहली बैठक 8 फरवरी 2024 को हुई थी, जिसमें उन्होंने एमएसपी पर कानून बनाने की अपनी मांग दोहराई। चार दिन बाद, 12 फरवरी को फिर बैठक हुई। इसके बाद, 10 दिनों के भीतर चार और बैठकें 15 और 18 फरवरी को हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।