FII Investment: भारतीय शेयर बाज़ारों में इन दिनों विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अपनी निवेश रणनीति बदलते हुए नज़र आ रहे हैं. महीनों तक लगातार बिकवाली करने के बाद अब वे लार्जकैप स्टॉक्स से निकलकर मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं.

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीएसटी सुधारों, मज़बूत घरेलू डिमांड और S&P की सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड जैसी सकारात्मक खबरों ने बाज़ार का सेंटिमेंट बेहतर किया है. इसी कारण FII अब “स्मार्ट मनी” को ग्रोथ स्टोरी से जुड़े नए सेक्टरों की ओर शिफ्ट कर रहे हैं.

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FII Investment

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किन सेक्टरों में बढ़ रही है दिलचस्पी? (FII Investment)

दौलत कैपिटल मार्केट्स के निदेशक (इक्विटी, एसेट और वेल्थ मैनेजमेंट) केदार कदम का कहना है “अगर प्रस्तावित जीएसटी सुधार लागू होते हैं तो कंज़म्प्शन सेक्टर वेल्थ क्रिएशन के अगले दौर की अगुवाई कर सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर घरेलू मांग पर पड़ेगा.”

फोकस सेक्टर:

  • ऑटोमोबाइल
  • FMCG
  • इंश्योरेंस
  • रिटेल

इनके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल एस्टेट, इंफ्रा और टेक-आधारित प्लेटफॉर्म्स भी टैक्स-फ्रेंडली और औपचारिक अर्थव्यवस्था से फायदा उठाने वाले सेक्टर माने जा रहे हैं.

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किन सेक्टरों से रखें दूरी? (FII Investment)

कदम के मुताबिक़ कुछ सेक्टर ऐसे हैं जहां निवेशकों को सावधानी रखनी चाहिए:

  • आईटी सर्विसेज – लंबे समय की तेज़ ग्रोथ के बाद अब ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं और टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग में सुस्ती का खतरा.
  • बैंक और NBFCs – बेहतर एसेट क्लास से लाभ मिल रहा है, लेकिन बढ़ता कॉम्पिटीशन, मार्जिन प्रेशर और लोन ग्रोथ में गिरावट चुनौती बने हुए हैं.
  • हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां – मांग पर कॉम्पिटिशन का दबाव, जिससे ग्रोथ कमजोर हो सकती है.

क्यों बदला FII का मूड? (FII Investment)

  • ग्लोबल आर्थिक झटकों और ट्रेड टेंशन के बीच FII लार्जकैप से फंड निकाल रहे हैं.
  • मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां ज़्यादातर घरेलू अर्थव्यवस्था पर निर्भर होती हैं, इसलिए बाहरी जोखिम का असर इन पर कम पड़ता है.

एक्सचेंज डेटा: 2025 की पहली छमाही में मिडकैप शेयरों में FII होल्डिंग्स 15% से अधिक बढ़ी हैं. यह संकेत है कि विदेशी निवेशक भारत की ग्रोथ स्टोरी और घरेलू मांग पर भरोसा जता रहे हैं.

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट एडवाइस (FII Investment)

  • शॉर्ट-टर्म में मिडकैप और कंज़म्प्शन सेक्टर अच्छे अवसर दे सकते हैं.
  • लंबी अवधि के लिए इंफ्रा और टेक-ड्रिवन प्लेटफॉर्म्स पर फोकस बढ़ाना बेहतर रहेगा.
  • आईटी, NBFC और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में निवेश करते समय सतर्कता ज़रूरी है.

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