सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, संक्रमण काल के दौरान देश का नेतृत्व राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, मुख्य न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी एजई और गार्जियन काउंसिल के एक न्यायविद सदस्य अलीरेजा अराफी की तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद करेगी।

परिषद को स्थायी सुप्रीम लीडर के चुनाव तक सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी ने सरकारी टीवी को बताया कि नई अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन तत्काल किया जा रहा है और यही परिषद अगले स्थायी सुप्रीम लीडर के चुनाव तक सर्वोच्च अधिकारों का प्रयोग करेगी।

ईरान हर परिस्थिति के लिए तैयार

उन्होंने कहा कि व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि देश हर परिस्थिति के लिए तैयार है और खामेनेई की मौत के बाद भी शासन व्यवस्था जारी रहेगी।

उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर लाल रेखा पार करने का आरोप लगाते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में उभरे हैं। परमाणु वार्ताओं, क्षेत्रीय कूटनीति और आंतरिक सुरक्षा मामलों का लंबा अनुभव रखने वाले लारीजानी को खामेनेई का भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता रहा है।

कौन है अयातुल्ला अलीरेजा अराफी?

अयातुल्ला अलीरेजा अराफी बने प्रमुख चेहराईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश की सत्ता व्यवस्था को संभालने के लिए गठित अंतरिम नेतृत्व परिषद में अयातुल्ला अलीरेजा अराफी एक अहम और प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान की एक्सपीडियेंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के प्रवक्ता मोहसिन देहनवी ने घोषणा की परिषद सामूहिक रूप से काम करेगी, लेकिन धार्मिक नेता होने के कारण अराफी को सबसे वरिष्ठ माना जा रहा है।

1959 में यज्द प्रांत के मेयबोद शहर में जन्मे अराफी धार्मिक परिवार से आते हैं। महज 11 वर्ष की उम्र में वे कोम चले गए, जहां उन्होंने इस्लामी शिक्षा हासिल की और धीरे-धीरे ईरान के धार्मिक ढांचे में अपनी मजबूत पहचान बनाई। पिछले तीन दशकों में अराफी ने कई प्रभावशाली पद संभाले।

वेटिकन में पोप फ्रांसिस से की थी मुलाकात

अंतरिम नियुक्ति से पहले वे देश की सेमिनरी प्रणाली के प्रमुख, गार्जियन काउंसिल के सदस्य और असेंबली आफ एक्सपर्ट्स के सदस्य जैसे अहम पदों पर एक साथ कार्य कर रहे थे। वर्ष 2022 में उन्होंने वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मुलाकात कर अंतरधार्मिक संवाद की पहल भी की थी।

अराफी को बहुभाषी और तकनीक-अनुकूल धार्मिक नेता माना जाता है। वे अरबी और अंग्रेजी में दक्ष हैं और कई मंचों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ईरानी विचारधारा को वैश्विक स्तर पर फैलाने की वकालत कर चुके हैं। हालांकि उनका कार्यकाल विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिए गए कड़े बयान के बाद कनाडा ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे।

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