दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) की तर्ज पर यमुना के पानी की गुणवत्ता की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए 41 ऑनलाइन मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, ये स्टेशन Yamuna River और उसमें गिरने वाले नालों के पानी के प्रदूषण स्तर पर लगातार नजर रखेंगे। इससे प्रदूषण की स्थिति का तुरंत आकलन किया जा सकेगा और समय रहते जरूरी कार्रवाई की जा सकेगी।

सरकार ने इन सभी स्टेशनों को जून 2026 तक चालू (लाइव) करने का लक्ष्य तय किया है। इन मॉनिटरिंग स्टेशनों के जरिए यमुना के पानी के प्रवाह (Flow) के साथ-साथ कुल 11 प्रकार के प्रदूषण पैरामीटर की जांच की जाएगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर प्रदूषण ज्यादा है और उसका स्रोत क्या है।

जून 2026 तक सभी स्टेशनों को लाइव करने का लक्ष्य

डीपीसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इनमें से 6 स्टेशन सीधे Yamuna River पर पल्ला से ओखला बैराज के बीच लगाए जाएंगे, ताकि नदी के मुख्य प्रवाह की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके। वहीं, बाकी 35 मॉनिटरिंग स्टेशन यमुना में गिरने वाले प्रमुख नालों पर लगाए जाएंगे। इनमें नजफगढ़ ड्रेन , शाहदरा ड्रेन , बारापुला ड्रेन जैसे बड़े प्रदूषण स्रोत शामिल हैं।  इन नालों से यमुना में बड़ी मात्रा में गंदा पानी और औद्योगिक अपशिष्ट गिरता है, इसलिए यहां मॉनिटरिंग से प्रदूषण के असली स्रोतों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

अब पारंपरिक तरीके से हटकर आधुनिक तकनीक से की जाएगी। अभी तक पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपलिंग आधारित सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कार्रवाई में देरी होती है। Delhi Pollution Control Committee (DPCC) हर महीने यमुना के अलग-अलग स्थानों से 8 सैंपल लेती है ,इन सैंपल्स को लैब में भेजकर जांच कराई जाती है ,पूरी प्रक्रिया में करीब एक हफ्ते का समय लग जाता है। रिपोर्ट आने में देरी होने से तुरंत कार्रवाई संभव नहीं हो पाती प्रदूषण के वास्तविक समय (Real-Time) स्तर का पता नहीं चल पाता कई बार स्थिति बिगड़ने के बाद ही जानकारी मिलती है सरकार द्वारा प्रस्तावित 41 रियल-टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन लगने के बाद प्रदूषण स्तर की तुरंत जानकारी मिलेगी अधिकारियों को फौरन एक्शन लेने में मदद मिलेगी यमुना सफाई अभियान को डेटा आधारित मजबूती मिलेगी।

यमुना में प्रदूषण का मुख्य सोर्स

दिल्ली में बहने वाली Yamuna River का सिर्फ 22 किलोमीटर हिस्सा ही राजधानी में आता है, जो इसकी कुल लंबाई का महज 2 फीसदी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी हिस्से पर कुल प्रदूषण का 76 फीसदी लोड पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी प्रदूषण के पीछे सबसे बड़ी वजह नालों से गिरने वाला गंदा पानी है। नजफगढ़ ड्रेन अकेले करीब 70 फीसदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है शाहदरा ड्रेन से लगभग 16 फीसदी प्रदूषण आता है इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार अब यमुना नदी और उसमें गिरने वाले ड्रेनों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने जा रही है।

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