ओडिशा सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के मेधावी छात्रों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है। इस योजना का नाम है ‘विदेश शिक्षा वृत्ति’। इस पहल के तहत छात्र अब दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज में पोस्ट-ग्रैजुएट और पीएचडी कोर्सेज की पढ़ाई कर सकेंगे।
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने औपचारिक रूप से इस योजना का शुभारंभ किया। यह स्कॉलरशिप स्कीम शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से लागू की जाएगी।
यह योजना छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए बड़ी वित्तीय मदद देगी। चयनित छात्रों को उनकी पढ़ाई में मदद के लिए प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह राशि ट्यूशन फीस, रहने का खर्च और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में सहायक होगी। हर साल कुल 50 मेधावी छात्रों का चयन इस स्कॉलरशिप के लिए किया जाएगा।
कौन हो सकता है पात्र ?
इस योजना के लिए पात्रता मानदंड भी स्पष्ट किए गए हैं। आवेदक छात्र के परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। छात्रों को दुनिया के टॉप 200 क्यूएस-रैंक (QS-ranked) वाले विदेशी यूनिवर्सिटीज या इंस्टीट्यूट में पोस्ट-ग्रैजुएट (PG) या पीएचडी कोर्सेज में एडमिशन प्राप्त होना चाहिए।

चयन प्रक्रिया और आवेदन का समय
- इस योजना के तहत छात्रों के चयन के लिए साल में दो बार आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
- पहला चक्र : जुलाई-अगस्त में।
- दूसरा चक्र : दिसंबर-जनवरी में।
50 छात्रों का चयन करते समय, सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए सीटें निर्धारित की हैं –
- इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा: 10 छात्र (4 PG और 6 PhD)
- मेडिकल, कृषि, वास्तुकला और अन्य तकनीकी स्ट्रीम: 10 छात्र (4 PG और 6 PhD)
- उच्च शिक्षा के अन्य क्षेत्र : 30 छात्र (10 PG और 20 PhD)
मंत्री ने कहा कि यह कदम ओडिशा के एससी और एसटी छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने में मदद करेगा जिससे वे वापस आकर राज्य के विकास में योगदान कर सकें। सरकार की यह पहल गरीब और मेधावी छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का रास्ता खोलकर सामाजिक न्याय और शिक्षा में समानता को बढ़ावा देगी।
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