रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर एक के बाद एक लगातार बड़ी सफलता मिलते जा रही है. इस कड़ी में एक सफलता झीरमकांड संबंधी भी मिली है. मामला झीरम घाटी हमले से जुड़े नक्सलियों से सरेंडर से जुड़ा हुआ है.

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दरअसल सुरक्षाबलों के समक्ष शुक्रवार को नक्सली नेता श्याम दादा सहित 9 माओवादियों ने समर्पण किया. श्याम दादा झीरम हमले का मास्टर माइंड रहा है. इसे लेकर अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए सोशल प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट किया है.

बघेल ने सरकार को घेरते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से सवाल किया है कि अब तो पता चल ही जाएगा कि झीरम का हमला कैसे हुआ था ?… तो अब उम्मीद की जा सकती है कि झीरम के मास्टरमाइंड से एनआईए जरूर पूछताछ करेगी. पता तो चले कि षड़यंत्र किसने रचा और क्यों रचा ? आखिर भाजपा इस जाँच को क्यों रोकना चाहती थी?

बता दें कि पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत शुक्रवार को झीरम हमले के मास्टरमाइंड DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के वरिष्ठ सदस्य चैतू उर्फ श्याम दादा के साथ 10 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था.

लगभग 60 वर्षीय चैतू उर्फ श्याम दादा, जिसका पूरा नाम गिरी रेड्डी पवन दा रेड्डी है, मूलतः ग्राम तुलसापुर, मंडल रघुनंदापल्ली, जिला वारंगल, तेलंगाना का रहने वाला है. वह DKSZC का वरिष्ठ सदस्य और दरभा डिवीजन का इंचार्ज था. उसके खिलाफ 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान चैतू ने अपने पास रखी AK-47 रायफल भी पुलिस के हवाले कर दिया था.

कैसे हुआ झीरम घाटी नरसंहार

झीरम घाटी में नक्सलियों ने 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं के काफिले को निशाना बनाकर कायराना हमला किया था, देश के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर निकले छत्तीसगढ़ के कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित 33 लोगों की नक्सलियों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी.

घटना को अंजाम देने के लिए सीआरसी- 2 के करीब 300 हार्डकोर नक्सली आधुनिक हथियारों से लैस होकर पहुंचे थे. 300 नक्सलियों की मदद के लिए दरभा, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर से आएं जन मिलिशिया कमेटी के करीब 500 नक्सलियों को लगाया गया था. इसमें नक्सलियों के ब्रेकअप पार्टी और मेडिकल टीम के सदस्य भी शामिल रहे हैं.

30 दिनों तक चली थी प्रैक्टिस

झीरम कांड को अंजाम देने के लिए हिकुम गांव में नक्सलियों के द्वारा एक महीने तक अभ्यास किया गया था. दरभा घाटी की भौगोलिक परिदृश्य को हिकुम के जंगल में तैयार की गई थी. गांव के समीप जंगल में अस्थाई रूप से दरभा घाटी तैयार कर जवानों को टारगेट करने के लिए 30 दिनों तक रोजाना सुबह-शाम प्रैक्टिस चलती रही थी.

बैलाडीला के बारूद से लिखी थी पटकथा

झीरम नरसंहार को अंजाम देने के लिए घाटी में नक्सलियों ने अलग-अलग हिस्सों में छोटे-बड़े कई आईईडी लगाए गए थे. सुकमा से परिवर्तन रैली समाप्त करने के बाद कांग्रेसियों का काफिला जैसे ही घाटी में पहुंचा था वहां सामने चल रही वाहन को ब्लास्ट कर नक्सलियों के द्वारा जोरदार धमाका कर एक के बाद एक कई लोगों की हत्याएं कर दी गईं.