नितिन नामदेव, रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को विधानसभा में धर्म स्वातंर्त्य विधेयक संशोधन पारित करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म स्वातंर्त्य विधेयक सर्व समाज के लिए हितकारी है. उन्होंने कहा कि उनके पिता स्व. दिलीप सिंह जूदेव ने हमेशा धर्मांतरण को रोकने का प्रयास किया. प्रदेश की भाजपा सरकार ने धर्म स्वातंर्त्य विधेयक पारित कर उनके सपनों को साकार करने का महती प्रयास किया और उन्हें दी है.

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जूदेव ने कहा कि धर्म स्वातंर्त्य विधेयक पारित होने से न केवल जनजाति समाज बल्कि प्रदेश की पूरी जनता को इसका लाभ होगा. वहीं धर्मांतरण कराने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. इस कानून को पारित होने से अब जनजाति सहित सभी समाज के सांस्कृतिक विरासत और संस्कृति को पुनः सम्मान मिलेगा. साथ ही समाज के लोगों को अब प्रलोभन, दबाव और भ्रमित कर धर्मांतरित नहीं किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण रोकने के लिए स्व. दिलीप सिंह जूदेव जी ने आजीवन प्रयास किया और घर वापसी अभियान का जमीनी कार्यक्रम लगातार उनके द्वारा चलाया गया, जो अभी तक चल रहा.
आगे कहा कि धर्म स्वातंर्त्य विधेयक पारित होने के लिए स्व. दिलीप सिंह जूदेव का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. वनवासी कल्याण आश्रम के संस्थापक बालासाहेब देशपांडे और स्वामी अमरानंद के मार्गदर्शन में दिलीप सिंह जूदेव ने घर वापसी अभियान, लम्बी पदयात्राए और सनातन जनजागरण आंदोलन जैसे अनेकानेक कार्यक्रम चलाकर पहले ही इसका संकेत दे दिया था.
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जूदेव ने विधानसभा में इस अत्यधिक प्रतीक्षित और अत्यंत आवश्यक धर्म स्वातंर्त्य संशोधन विधेयक के पारित किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और छत्तीसगढ़ सरकार का आभार व्यक्त माना. उन्होंने कहा कि वह लगातार अपने स्व. पिता दिलीप सिंह जूदेव के सपने को साकार करने निरंतर प्रयासरत रहेंगे और घर वापसी कार्यक्रम लगातार सतत जारी रहेगा. सनातन के अनुयायियों के हितों की मजबूती से सुरक्षा करना हमारा नैतिक दायित्व है.
प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि पिताजी कुमार दिलीप सिंह जूदेव के आजीवन संघर्षों, समर्पण और धर्म-संरक्षण के लिए उनके अथक प्रयासों को नमन करते हुए यह विधेयक उनके आदर्शों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश में धर्म, आस्था एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ समाज में विश्वास और संतुलन को सुदृढ़ करने वाला सिद्ध होगा.
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