….जब मुखिया करिन पुरखा के सुरता, त गुरु के होइस सम्मान, छत्तीसगढ़ के बाढ़िस मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ को गढ़ने, संवारने, सुंदर बनाने में हमारे पुरखों बड़ा योगदान रहा है. 2000 के बाद की पीढ़ी शायद छत्तीसगढ़ के आंदोलनकारी हमारे-अपने पुरखों के बारे में कम ही जानती है. गाँधी को अच्छी तरह से जानने और मानने वाले नए-पुराने वाले कुछ लोग शायद ऐसे भी होंगे, जिन्हें यह पता हो कि गाँधी ने छत्तीसगढ़ में जिन्हें गुरु माना, जिनसे गाँधी ने प्रेरणा ली वे इस मिट्टी के ही लाल थे. नाम था पंडित सुंदरलाल शर्मा.

इतिहासकारों से लेकर साहित्यकारों और आम जनमानस उन्हें छत्तीसगढ़ का गाँधी भी कहा. खैर इस संक्षिप्त चर्चा में विषय को मुखिया, पुरखा के सुरता और मान-सम्मान तक ही सीमित रखना ही सही, क्योंकि विस्तार देने से हो सकता है मूल बात मूल में ही रह जाए.

छत्तीसगढ़ में गाँधी पर चर्चा हो और गाँधी के गुरु पर नहीं, तो कुछ अधूरापन स लगता है. कोई कमी सी खलती है. ऐसे में मुखिया के लिए जरूरी है कि वे अपने पुरखों को न भूले. विशेषकर तब, जब गाँधी विचार पयदात्रा निकाली जा रही हो. ऐसे में गाँधी के गुरु को याद करना मुखिया के लिए जरूरी है.

मुखिया ने गाँधी के गुरु को याद रखा. उन्होने कंडेल नहर सत्याग्रह के नायक बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव को भी याद किया और याद किया उस नायक को भी जो गाँधी के लिए नायक थे. समाचार माध्यमों में या अन्य जगहों पर भले ही गाँधी के गुरु गुड़ की तरह रह गए हो, लेकिन यह जानकर अच्छा लगा कि मुखिया ने न सिर्फ उन्हें याद किया, बल्कि उनके परिवार को सम्मानित भी.

छत्तीसगढ़ के सत्याग्राही नायक बाबू छोटेलाल की प्रतिमा अनावरण और उनके परिवारवालों को जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सम्मानित कर रहे थे, तो इस सम्मान में एक नाम गाँधी के गुरु के परिवारवालों का भी था. पं. सुंदरलाल शर्मा के परिवारवालों का. शायद यहाँ भले ही मुखिया पुरखों के परिवारवालों को सम्मानित कर रहे थे, लेकिन यह कहना लगता नहीं होगा कि उन्हें सम्मानित करते वक़्त उन्होंने अनुभव किया होगा, कि शायद यहाँ उनका सम्मान हो रहा है. यह क्षण गौरण का था. आत्म गौरव का.

उम्मीद है मुखिया इसी तरह से प्रदेश के पुरखों को याद करते रहेंगे. उन्हें कभी भी, किसी भी अवसर पर भूलेंगे नहीं. क्योंकि पुरखा मन के जब होवत रइही सम्मान, छत्तीसगढ़ के बाढ़त रइही मान.

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