रांची सीआईडी की साइबर अपराध पुलिस ने जमशेदपुर से सरताज आलम को गिरफ्तार किया है। उस पर बेरोजगार युवकों को थाईलैंड के बैंकॉक भेजकर साइबर ठगी में लगाने का आरोप है। अब तक झारखंड के 15 युवकों को मुक्त कराया गया है, जिनमें तीन जमशेदपुर के हैं। आरोपी आकर्षक नौकरी का लालच देकर युवाओं को फंसाता था और उनसे जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी करवाता था। पुलिस ने अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहने की अपील की है। आरोप है कि युवकों को थाईलैंड और कंबोडिया में नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा जाता था और वहां साइबर ठगी में जबरन लगाया जाता था.

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन संचालित साइबर अपराध थाने की पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर के आजाद नगर थाना क्षेत्र के मानगो जाकिर नगर रोड नंबर तीन निवासी सरताज आलम को गिरफ्तार किया है। 

झारखंड सीआईडी (अपराध अनुसंधान विभाग) ने साइबर अपराध और मानव तस्करी से जुड़े एक इंटरनेशनल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में सीआईडी की टीम ने जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र निवासी सरताज आलम को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए बेरोजगार युवकों को थाईलैंड, बैंकॉक, कंबोडिया और लाओस में नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा जाता था और वहां उनसे जबरन साइबर स्लेवरी करवाई जाती थी.

जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने विदेशी सहयोगियों के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को आकर्षक वेतन वाली विदेशी नौकरी का प्रलोभन देता था. युवकों को डाटा एंट्री या अन्य आसान काम का भरोसा दिलाकर वीजा और टिकट के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी. विदेश पहुंचने के बाद उन्हें कथित स्कैम सेंटर में रखा जाता था, जहां ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जाता था.

सीआईडी के अनुसार, इन युवाओं को इन्वेस्टमेंट घोटाला, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर फ्रॉड गतिविधियों में जबरन शामिल किया जाता था. फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर वाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से लोगों को आकर्षक निवेश योजनाओं का लालच दिया जाता था. इसके बाद लिंक भेजकर ठगी को अंजाम दिया जाता था.

विदेशी साइबर अपराधियों के साथ मिलकर भारत स्थित एजेंट्स यहां के बेरोजगारों को ठग रहे हैं। बेरोजगार युवकों से ये एजेंट्स संपर्क करते हैं और उन्हें बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस व थाईलैंड में डाटा एंट्री व अन्य नौकरियों का प्रस्ताव दिया जाता था। 

वीजा व टिकट के नाम पर बेरोजगार युवकों से धनराशि जमा कराई जाती थी। विदेश पहुंचने पर पीड़ितों को स्कैम सेंटर के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता था। उन्हें वाट्सएप, इंस्टाग्राम व फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल, खाता बनाकर संभावित विदेशी नागरिकों से संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था।

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