जीतेन्द्र सिन्हा, गरियाबंद। जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल में स्थित ग्राम फूलझर में पीने के पानी और निस्तार की स्थिति गंभीर हो गई है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। नल-जल योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी टंकी पिछले कई महीनों से बंद पड़ी है, जिससे लगभग 400 की आबादी वाले गांव में लगे 1770 घरेलू नल पूरी तरह ठप हो चुके हैं।

बता दें कि ग्राम फूलझर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं, पानी की जगह केवल हवा निकल रही है। मजबूरन ग्रामीण तड़के सुबह उठकर करीब 2 किलोमीटर दूर जमाही गांव जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। आज 22 मार्च, विश्व जल दिवस के मौके पर भी गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। भीषण गर्मी के बीच पीने के पानी और निस्तार की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और इन लोगों को राहत मुहैया कराएगा।

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