पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनू राम की हालत खराब होने पर उन्हें पैदल और खाट में लादकर लगभग 17 किलोमीटर दूर पहाड़ों से नीचे उतारना पड़ा, लेकिन पंचायत मुख्यालय तक भी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी। आखिरकार परिजनों को उन्हें निजी वाहन से मैनपुर सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया।

घटना बुधवार सुबह हुई जब मनू राम बेसुध होकर गिर पड़े। उनके परिजनों ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कुल्हाडीघाट मुख्यालय तक पहुँचाया। यहां भी एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन स्वास्थ्य सेवा की असुविधाजनक स्थिति के चलते कोई मदद नहीं मिली। वीडियो में देखा जा सकता है कि मरीज को खाट में लादकर नीचे ले जाया जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

मैनपुर बीएमओ गजेन्द्र ध्रुव से जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहा, मैं कल नहीं था, मुझे इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। इसके आधे घंटे बाद उन्होंने वापस कॉल कर दोबारा बताया कि मरीज का हाई बीपी था और उनको पैरालिसिस अटैक हुआ था। परिजनों ने कोई कॉल नहीं किया होगा। इसलिए उन्हें कुल्हाड़ीघाट से एंबुलेंस नहीं मिला।

जिला अस्पताल में उपचार:

जिला अस्पताल में भर्ती चिकित्सक हरीश चौहान ने बताया कि मनू राम को लगभग डेढ़ बजे दोपहर में भर्ती किया गया। उनका मामला स्ट्रोक का है और दाहिने साइड लकवा मार चुका है। चिकित्सकों की टीम मरीज को उचित उपचार प्रदान कर रही है, लेकिन इस घटना ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

स्थानीय लोग स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं और इसे पहाड़ी इलाकों में इमरजेंसी सेवाओं की अनदेखी का उदाहरण बता रहे हैं।

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