राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। आईएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश थमा नहीं है। लगतार सवर्ण समाज अफसर पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहा है। इस बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कुछ ऐसा कह दिया जिससे राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दरअसल, उन्होंने दबी जुबान में आईएएस संतोष वर्मा का समर्थन कर दिया। 

दिग्विजय सिंह ने आईएएस संतोष वर्मा को लेकर कहा, ‘किस संदर्भ में उन्होंने अपनी बात कही है यह देखना होगा। अपनी बात को लेकर उन्होंने स्पष्टीकरण भी दे दिया है। बात ये नहीं है कि उनका बयान क्या है। बात ये है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के अंदर ये भावना क्यों पैदा हो रही है। कहीं न कहीं कमी तो है, हम ही लोगों में कमी होगी।’

अगला CM SC-ST का! 

उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को सीएम बनाए जाने की इच्छा जताई। उन्होंने कांग्रेस की सरकार आने पर मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे प्रसन्नता होगी। 

भोपाल डिक्लेरेशन दलित एजेंडा नहीं था

दिग्विजय सिंह ने वताया कि 13 जनवरी 2027 को भोपाल डिक्लेरेशन 2 जारी होगा। यह दलित एजेंडा नहीं था। उसमें अनुसूचित जाति के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए भी था। इमरजेंसी के साथ एससी-एसटी के लोगों को गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप दिए गए। 

Gen Z पर कांग्रेस का फोकस

दिग्विजय सिंह ने आगामी चुनाव से पहले ये संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस का पूरा फोकस Gen Z पर है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 2000 के बाद पैदा हुए (Gen Z) से भी चर्चा करने की जरूरत है। यूथ पॉलिसी बनना चाहिए। शासकीय खरीद में 2002-03 में आरक्षण दिया गया था। डिप्लोमा और डिग्री होल्डर को बिना टेंडर काम दिया। 

MP चेप्टर का ड्राफ्ट तैयार 

उन्होंने बताया कि मप्र चेप्टर का ड्राफ्ट तैयार किया है। कल सुझाव लिए जाएंगे। कल बड़ी बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रस्ताव पारित किया जाएगा। 13 जनवरी 2027 को नेशनल लेवल पर जारी होगा। पूरे प्रदेश के साथ अन्य प्रदेशों से सुझाव लिए जाएंगे। सुझाव के लिए बीजेपी विधायकों को भी बुलाया गया है। संविधान, लोकतंत्र को लेकर भी चर्चा होगी। 

2002 का एजेंडा फेल होने पर कही ये बड़ी बात

दिग्विजय सिंह ने 2002 का एजेंडा फेल होने पर कहा कि सरकार को समय कम मिला था। डेढ़ साल कम ही होता है। कई विषयों में लाभ मिला। लेकिन सरकारी जमीनों पर दबंगों का कब्जा था। 

दबंगों को हटाकर गरीबों को पट्टा दिए गए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान हुआ था। सरकार जाने के बाद कई के पट्टे कैंसिल हुए। कमलनाथ सरकार ने वापस पट्टा दिलाने का अभियान चलाया। 

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