अभिषेक सेमर, तखतपुर। जनपद पंचायत की आज आयोजित होने वाली सामान्य सभा की बैठक उस समय स्थगित हो गई, जब जनपद पंचायत अध्यक्ष सहित सभी 25 निर्वाचित सदस्यों ने बैठक का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया। बैठक में लिए जाने वाले महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा से पहले ही जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए असंतोष व्यक्त किया।

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सीईओ द्वारा लगातार मनमानी की जा रही है और जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं। विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लगातार कमजोर किया जा रहा है, जिससे जनपद पंचायत का कार्य सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है।

उच्च अधिकारियों से शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्यों ने बताया कि सीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी विभागीय मंत्री सहित उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सभी जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। इसी नाराजगी के चलते आज की सामान्य सभा बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।

सीईओ को हटाने की मांग तेज

जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक सीईओ को पद से नहीं हटाया जाता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता, तब तक जनपद पंचायत की बैठकों में भाग लेना संभव नहीं होगा। उन्होंने विभागीय मंत्री एवं उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर सीईओ को हटाने की मांग दोहराई।

महत्वपूर्ण एजेंडों पर नहीं हो सकी चर्चा

उल्लेखनीय है कि आज की सामान्य सभा बैठक में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों, योजनाओं की समीक्षा एवं आगामी प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। इससे जनपद क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

जनपद पंचायत अध्यक्ष डॉ.माधवी संतोष वस्त्रकार ने कहा कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें उम्मीद और विश्वास के साथ चुनकर भेजा है, लेकिन अधिकारी एवं कर्मचारी जनपद सदस्यों की बातों और मांगों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद कार्यालय में पारदर्शिता के साथ काम नहीं किया जा रहा है। कई बार आय-व्यय का लेखा-जोखा मांगा गया, लेकिन आज तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका भी उत्पन्न हो रही है। इसी कारण सभी जनपद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों उनके साथ हैं। सीईओ की शिकायत क्षेत्रीय विधायक और विभागीय मंत्री से मिलकर की जा चुकी है और जल्द ही तखतपुर से हटाने की मांग की गई है। साथ ही अगर जनपद के आला अधिकारी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होगी तब तक बैठक इसी तरह बहिष्कृत किया जाएगा सदस्यों और जनप्रतिनिधियों का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राकेश तिवारी जनपद उपाध्यक्ष ने बताया कि जनपद पंचायत के गठन होने के बाद सदस्यों के द्वारा बहुत सारे एजेंडे में चर्चा कर विभिन्न विभागों को कार्य को करने के लिए निर्देशित किया जाता है लेकिन सदस्यों के द्वारा जन आकांक्षा को लेकर यहां बैठक में अपनी बात रखते है लेकिन उसके बाद भी उनका कार्य नहीं हो रहा है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारी बैठक में अपने असिस्टेंट को भेज कर कोरम पूर्ति करते है और बैठक में उपस्थित नहीं होते है। कुछ दिन पहले जिला पंचायत राज्य निधि के द्वारा 30 से अधिक आंगनबाड़ी लगभग 2 करोड़ का कार्य पंचायतों में स्वीकृत हो जाता है लेकिन जनप्रतिनिधियों को कानों कान खबर नहीं लगती है। उपाध्यक्ष ने बताया कि विधायक जी के संज्ञान में यह जानकारी सदस्यों के द्वारा दे दी गई है। अधिकारियों के कार्य प्रणाली पर सुधार होना चाहिए अधिकारियों को कर्मचारी बनकर कार्य करना चाहिए  नेता बनने की कोशिश ना करें

जनपद पंचायत में विधायक प्रतिनिधि प्रमोद ठाकुर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से जनता को अपेक्षाएं रहती हैं। वे जनता की समस्याओं और मांगों को बैठक में उठाकर अधिकारियों के संज्ञान में लाते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से सदस्य नाराज हैं। उन्होंने कहा कि जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यदि वित्तीय जानकारी मांगी जाती है तो उसे उपलब्ध कराना आवश्यक है।

इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सत्यव्रत तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि सभी सदस्यों का पूरा सम्मान किया जा रहा है और आगे भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपद पंचायत के सभी कार्य शासकीय नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं है। आज की बैठक में आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन सदस्यों द्वारा बैठक स्थगित किए जाने के कारण जानकारी प्रस्तुत नहीं की जा सकी।

फिलहाल बैठक बहिष्कार के बाद जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।