दिल्ली अब अपनी पहचान को केवल ऐतिहासिक इमारतों, मॉल और सड़कों तक सीमित नहीं रखना चाहती। राजधानी धीरे-धीरे हरे-भरे इलाकों और नदी किनारे के क्षेत्रों को नए और आकर्षक रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बांसेरा पार्क के पास एक नया पर्यटन हब विकसित करने का फैसला किया है। योजना के तहत यहां पारंपरिक कश्मीरी शैली की हाउसबोट तैयार की जाएगी। इस परियोजना पर करीब 4 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
यह हाउसबोट असली पानी में तैरने वाली नाव नहीं होगी, बल्कि जमीन पर स्थायी रूप से बनाई जाएगी। इसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि देखने में कश्मीर की डल झील में तैरने वाली हाउसबोट जैसी लगे। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का मानना है कि यह संरचना आने वाले 50 सालों तक सुरक्षित और मजबूत बनी रहेगी। इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई इमारत बनाना नहीं है, बल्कि यमुना किनारे के इलाके को एक नए पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
दिल्ली का बांसेरा पार्क क्यों है खास?
बांसेरा पार्क यमुना के पश्चिमी किनारे पर स्थित है और धीरे-धीरे यह दिल्ली का एक लोकप्रिय घूमने का स्थल बनता जा रहा है। पार्क में हरियाली, खुले मैदान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अब आधुनिक मनोरंजन सुविधाएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने इसे केवल एक सामान्य पार्क न बनाकर ऐसा स्थान बनाने की योजना बनाई है, जहां लोग परिवार के साथ समय बिता सकें, कार्यक्रम आयोजित कर सकें और प्रकृति के करीब रह सकें। इस सोच का अगला कदम है हाउसबोट, जो पार्क की पहचान और आकर्षण को और मजबूत करेगा और दिल्लीवासियों को शहर के भीतर ही कश्मीर जैसी अनुभवात्मक सौंदर्य का आनंद लेने का अवसर देगा। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों के अनुसार, यह हाउसबोट रहने के लिए नहीं, बल्कि मनोरंजन और कार्यक्रमों के लिए बनाया जाएगा।
इसमें प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार होंगी:
बड़ा मल्टीपर्पज हॉल: छोटे कार्यक्रम, मीटिंग और निजी आयोजन के लिए।
लॉबी, पैंट्री और स्टोर: आयोजन और सुविधा के लिए आवश्यक स्थान।
खाने के लिए अलग जगह: सार्वजनिक और निजी खाने के लिए।
आगे और पीछे डेक: बाहर बैठने और खुले वातावरण का अनुभव लेने के लिए।
बीच वाला डेक: शीशे से घिरा मीटिंग हॉल, जिसमें लगभग 15 लोग आराम से बैठ सकेंगे, खासकर कॉर्पोरेट मीटिंग और छोटे आयोजन के लिए।
बालकनी और स्टोरेज एरिया: अतिरिक्त सुविधा के लिए।
दोनों तरफ सीढ़ियां: हाउसबोट में प्रवेश आसान बनाने के लिए।
यह हाउसबोट पार्क की पहचान को और मजबूत करेगा और दिल्लीवासियों को शहर के भीतर ही मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनुभव देने का अवसर प्रदान करेगा।
बांसेरा पार्क हाउसबोट परियोजना के लिए DDA ने टेंडर प्रक्रिया शुरू
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने हाउसबोट परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के अनुसार, जिस एजेंसी को यह ठेका मिलेगा, उसे छह महीने के भीतर हाउसबोट का निर्माण पूरा करना होगा। ठेकेदार को परियोजना मिलने के 30 दिनों के भीतर या निर्माण शुरू होने से पहले हाउसबोट का डिजाइन प्रस्तुत करना होगा। इन डिजाइनों की मान्यता प्राप्त संस्थानों से जांच कराना अनिवार्य होगा, ताकि सुरक्षा और मजबूती के किसी भी पहलू में कोई कमी न रह जाए।
कश्मीरी लकड़ी और फारसी नक्काशी की खूबसूरती
इस हाउसबोट की सबसे खास बात इसकी बनावट और डिजाइन होगी। इसे पूरी तरह पारंपरिक कश्मीरी शैली में तैयार किया जाएगा, जिससे देखने में ऐसा लगेगा जैसे यह डल झील की हाउसबोट हो। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लकड़ियां और डिजाइन नींव: देवदार की लकड़ी, ऊपरी ढांचा: सीडर लकड़ी, नक्काशी और सजावट: अखरोट की लकड़ी, छत और अंदरूनी दीवारें: चिनार की लकड़ी के पैनल, रेलिंग, खंभे, मेहराबदार दरवाजे और बाहरी दीवारें: फारसी शैली की बारीक नक्काशी, खिड़कियां: कांच के साथ नक्काशीदार फ्रेम, जो हाउसबोट को शाही और आकर्षक रूप देंगे डीडीए का कहना है कि यह हाउसबोट केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि कला का जीवंत नमूना होगी, जो पार्क की पहचान को और मजबूत करेगी और दिल्लीवासियों को शहरी पर्यटन के भीतर ही कश्मीरी अनुभव का आनंद देगी।
सुरक्षा और मजबूती पर खास ध्यान
इस हाउसबोट की निर्माण प्रक्रिया में लकड़ी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
लकड़ी का सुखाना: सभी लकड़ियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह सुखाया जाएगा, ताकि समय के साथ मुड़ने या खराब होने की समस्या न हो।
जोड़ों का सीलिंग: जोड़ों को प्राकृतिक रेजिन और मौसम से बचाने वाले पदार्थों से सील किया जाएगा।
अग्निरोधक उपाय: लकड़ी की सतह पर दो परतें अग्निरोधक पेंट लगाई जाएंगी, जिससे आग का खतरा कम होगा।
छत: पर्यावरण के अनुकूल कैल्शियम सिलिकेट फॉल्स सीलिंग टाइल्स लगाई जाएंगी।
डेक एरिया और फर्श: डेक में लकड़ी की रेलिंग और दरवाजे होंगे, जबकि फर्श पर इंजीनियर्ड वुड का इस्तेमाल किया जाएगा।
दीवारें और दरवाजे: दीवारों पर फायर रेजिस्टेंट बोर्ड और लकड़ी के पैनल लगाए जाएंगे, और दरवाजे भी फायर रेजिस्टेंट लकड़ी से बनाए जाएंगे।
नींव: हाउसबोट की नींव पूरी तरह कंक्रीट की होगी, जिससे यह कई दशकों तक सुरक्षित और मजबूत बनी रहे।
दिल्ली में पर्यटन और संस्कृति का नया चेहरा
पिछले कुछ वर्षों में बांसेरा पार्क लगातार नए आकर्षण जोड़ता रहा है। दिसंबर 2025 में पार्क में बंधा हुआ हॉट एयर बैलून स्थापित किया गया, जिससे लोग ऊपर से पार्क और यमुना नदी का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। इसके अलावा, पार्क में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आने वाले समय में पलाश फेस्टिवल का आयोजन भी होने वाला है, जो पार्क को और अधिक जीवंत और आकर्षक बनाएगा। अब इस पार्क में बनने वाली हाउसबोट केवल एक इमारत नहीं होगी, बल्कि यह दिल्ली की सोच में आए बदलाव का प्रतीक होगी। शहर अब केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि लोगों को प्रकृति, कला और संस्कृति से जोड़ना चाहता है। डीडीए के इस कदम से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार के अवसर बनेंगे, और दिल्ली को एक नई पहचान मिलेगी।
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