एक समय था जब दिल्ली की सड़कों पर डबल डेकर ‘सुविधा बसें’ लोगों की शान हुआ करती थीं। मुंबई की तरह ये बसें राजधानी में भी लोगों के लिए एक प्रतीक थीं। हालांकि, 1989 में पुराने वाहनों और सीएनजी बेड़े में बदलाव के कारण इन बसों को सड़कों से हटा दिया गया था। अब दिल्ली परिवहन निगम (DTC) इन बसों को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है अब ये बसें इलेक्ट्रिक मॉडल में आएंगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यात्रियों को सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। डीटीसी की योजना है कि नई इलेक्ट्रिक सुविधा बसें राजधानी में पहले प्रमुख रूट्स पर चलाई जाएँ और भविष्य में उन्हें शहर के अन्य हिस्सों तक भी विस्तारित किया जाए। यह कदम दिल्ली की स्मार्ट और हरित परिवहन नीति को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि शहरवासियों को पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और आधुनिक परिवहन सुविधा मिल सके।

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इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत अशोक लेलैंड ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत एक डबल डेकर बस प्रदान की है, जो फिलहाल ओखला डिपो में खड़ी है। जल्द ही इस बस का ट्रायल चुनिंदा रूट्स पर शुरू किया जाएगा। डीटीसी का लक्ष्य है कि नई इलेक्ट्रिक सुविधा बसें पर्यावरण के अनुकूल, यात्रियों के लिए आरामदायक और आधुनिक परिवहन का अनुभव दें। भविष्य में इसे शहर के अन्य रूट्स तक भी विस्तारित किया जाएगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत अशोक लेलैंड ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत एक डबल डेकर बस प्रदान की है, जो फिलहाल ओखला डिपो में खड़ी है। जल्द ही इस बस का ट्रायल चुनिंदा रूट्स पर शुरू किया जाएगा। डीटीसी का लक्ष्य है कि नई इलेक्ट्रिक सुविधा बसें पर्यावरण के अनुकूल, यात्रियों के लिए आरामदायक और आधुनिक परिवहन का अनुभव दें। भविष्य में इसे शहर के अन्य रूट्स तक भी विस्तारित किया जाएगा।

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पायलट प्रोजेक्ट का रोमांच

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसों का परीक्षण किया जाएगा। अशोक लेलैंड द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत प्रदान की गई एक बस पहले ही ओखला डिपो में खड़ी है। जल्द ही इस बस का चुनिंदा रूट्स पर ट्रायल रन शुरू होने की संभावना है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया, “हमारे पास अभी एक बस है और दो और मिलने की उम्मीद है। हम रूट मैप तैयार कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये बसें दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षित और सुचारू रूप से चल सकें।” डीटीसी का उद्देश्य है कि इन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसों से यात्रियों को आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा मिले। भविष्य में इसे और अधिक रूट्स पर विस्तारित करने की योजना है।

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आसान नहीं होगा डबल डेकर बसों का सफर

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस 4.75 मीटर ऊंची और 9.8 मीटर लंबी है। यह बस 63 से ज्यादा यात्रियों को ले जा सकती है, जो दिल्ली की सामान्य नौ मीटर लंबी देवी बसों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक क्षमता प्रदान करती है। हालांकि, इसकी ऊंचाई और वजन कुछ चुनौतियाँ भी खड़ी करते हैं। कम ऊंचाई वाले पेड़, लटकती तारें और फ्लाईओवर इस बस के लिए संभावित रुकावट बन सकते हैं। डीटीसी के अधिकारी इस पर रूट स्टडी कर रहे हैं, जिसमें पेड़ों की शाखाओं और ओवरब्रिज की ऊंचाई मापी जा रही है। इसका उद्देश्य है कि यात्रियों और बस की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया जा सके।

परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि “इन बसों का वजन ज्यादा है, इसलिए शुरुआत में छोटे रूट्स पर बैटरी रेंज और संचालन क्षमता की जांच की जाएगी। देश में इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसों का अनुभव अभी सीमित है, इसलिए हमें सावधानी से कदम बढ़ाने होंगे।”

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क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

डीटीसी अधिकारियों के अनुसार, कम ऊंचाई वाले पेड़, लटकती तारें और फ्लाईओवर इस बस के संचालन के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं। इसी कारण रूट स्टडी की जा रही है, जिसमें पेड़ों की शाखाओं और ओवरब्रिज की ऊंचाई मापी जा रही है। इसका उद्देश्य यात्रियों और बस दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

आईसीसीटी के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें दिल्ली की पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, रूट का चयन सावधानी से करना होगा, क्योंकि ऊपरी डेक पर चढ़ने और उतरने में समय लग सकता है, जो सिस्टम की दक्षता को प्रभावित कर सकता है।”

पहले भी हुई कोशिशें

दिल्ली में डबल डेकर बसों को वापस लाने की कोशिशें नई नहीं हैं। पहले 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 के जी20 शिखर सम्मेलन से पहले भी ऐसी योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से उन्हें लागू नहीं किया जा सका। वास्तव में 2022 में सीईएसएल ने दिल्ली के लिए 1500 इलेक्ट्रिक बसों की योजना बनाई थी, जिसमें 100 डबल डेकर बसें शामिल थीं, लेकिन यह योजना भी अधूरी रह गई। इस बार डीटीसी ने इन्हें इलेक्ट्रिक मॉडल में लाने की तैयारी की है और पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इन बसों का परीक्षण किया जाएगा।

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