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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने अपने पड़ोसी राज्यों से अपील की है कि वे सीएनजी से ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट चलाएं. पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीएनजी पर चलता है. उन्होंने कहा कि NCR के राज्यों के साथ बैठक में हमने केंद्रीय मंत्री से निवेदन किया है कि एनसीआर के अंदर सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सीएनजी से चलाया जाए, क्योंकि दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीएनजी पर चलेगा और बाहर से आने वाला सारा पब्लिक ट्रांसपोर्ट अगर डीजल पर रहेगा, तो प्रदूषण दूर करने का दिल्ली का सारा प्रयास प्रभावित हो जाएगा.

दिल्ली: पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रदूषण पर जताई चिंता, अन्य राज्य सरकारों को दी नसीहत

गोपाल राय ने कहा कि हमने मांग की है कि एनसीआर के अंदर भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सीएनजी पर ट्रांसफर किया जाए, ताकि उससे पैदा होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके. हमने बताया कि दिल्ली के अंदर प्रदूषित ईंधन से चलने वाली सभी तरह की औद्योगिक इकाइयों को हमने 100 फीसदी पीएनजी में बदल दिया है. अन्य राज्यों को भी प्रदूषित ईंधन पर चलने वाली औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी में बदलने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन वहां पर गहन निगरानी और इकाइयों के पीएनजी पर ट्रांसफर करने का काम ढीला चल रहा है. हमने निवेदन किया है कि इसे जल्द किया जाए, ताकि औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके.

पड़ोसी राज्यों में चल रहे थर्मल पावर प्लांट को नई तकनीक में बदला जाए- गोपाल राय

मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर कोयले से चलने वाले दो थर्मल पावर प्लांट से चलते थे, जिसे दिल्ली ने बंद कर दिया है. वहीं अभी भी दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में न तो नई तकनीक लगाई गई है और न तो उसे बंद किया जा रहा है. वे हर साल छूट लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. उन पर जुर्माना लगाया जाता है और आगे बढ़ जाते हैं. जुर्माना लगाना इसका समाधान नहीं है. इन्हें या तो नई टेक्नोलॉजी में बदला किया जाए या फिर बंद किया जाए, क्योंकि उसकी जहरीली गैस वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है. साथ ही ईंट-भट्ठों की बात भी हमने उठाई.

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गोपाल राय ने बताया कि हरियाणा का कहना है कि वो जिकजैक तकनीक पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में भी काम हो रहा है, लेकिन अभी तक बहुत ही कम यूनिट जिकजैक तकनीक पर आई है. इस पर अगर कार्रवाई नहीं होती है, तो ठंड के मौसम में उसका प्रदूषण भी दिल्ली और उत्तर भारत के लोगों को झेलना पड़ेगा. हमने जेनसेट बंद रखने का भी प्रस्ताव रखा है.

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली में 24 घंटे बिजली उपलब्ध होने के कारण जेनसेट की उपयोगिता कम हो गई है. जेनसेट में एक नई तकनीक आई है, जिसे लगाने से उसमें प्रदूषण उत्सर्जन की क्षमता कम हो जाती है. पिछले साल जब सीवियर स्थिति में जा रहे थे और जेनसेट बंद करने की गाइड लाइट आई, तब भी हरियाणा में कई सारे जगहों पर इसलिए जेनसेट चलाने की छूट ली गई कि उन कॉलोनियों में बिजली नहीं है. हमने वहां पर इमरजेंसी व्यवस्था करने का अनुरोध किया है और सीवियर स्थिति में जेनसेट के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है.

स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने की अपील

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन अगर पड़ोसी राज्यों में पटाखे बेचने और जलाने की छूट दी जाती है, तो प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली में लोग वहां से पटाखे खरीदेंगे. इसलिए हमने सभी राज्यों में पटाखों की बिक्र पर पहले से ही प्रतिबंध लगाने की मांग की है, ताकि पटाखों की वजह से दिवाली पर होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके.

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी मुख्य अधिकारी और मंत्री लखनऊ में बैठते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा धूल और औद्योगिक प्रदूषण दिल्ली से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में होता है. इसी तरह, हरियाणा में अधिकारियों का पूरा अमला चंडीगढ़ में बैठता है, लेकिन प्रदूषण के सभी हॉटस्पॉट दिल्ली से सटे इलाकों में हैं. हमने प्रस्ताव रखा है कि वहां की सरकारें इन इलाकों के लिए एक टास्क फोर्स गठित करें, जो जमीनी स्तर कार्रवाई और निरीक्षण कर सकें और इस पर केंद्रीय होकर काम कर सकें. साथ ही, जिस तरह दिल्ली ने अपना हॉटस्पॉट चिन्हित किया है और हम वहां पर टीम लगाकर काम करते हैं. उसी तरह, पड़ोसी राज्यों में भी इन जगहों पर हॉटस्पॉट चिन्हित किया जाए और उसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर काम शुरू किया जाए.

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मंत्री गोपाल राय ने कहा कि मुझे लगता है कि इससे एनसीआर में दिल्ली के चारों ओर चल रहे निर्माण कार्य स्थलों पर होने वाले धूल के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल पाएगी.