विशेष : मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि से ‘छत्तीसगढ़’ में ‘बेरोजगारी’ दर घटी, कोरोना संकट में राज्य का मॉडल देश के लिए बना रोल मॉडल

फीचर स्टोरी । पूरा विश्व इन दिनों कोरोना संकट से जूझ रहा है. अमेरिका जैसे महाशक्ति देश भी इस संकट के आगे बेबस नज़र आ रहा है. रूस, इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों में बहुत बुरी स्थिति है. इन देशों में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं. लोगों की नौकरियाँ छिन रही है. भारत के भी कई राज्यों में हालात बेहद ही खराब है. लेकिन इन सबके बीच छत्तीसगढ़ इकलौता ऐसा राज्य जिसने कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच न सिर्फ़ अपनी क्षमता को साबित किया है, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया है कि एक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ऐसे विपरीत समय के बीच किस तरह संभालना चाहिए. ऐसे वक्त में सही समय पर, सही निर्णय लेकर किस तरह से संयम और संतुलन बनाकर काम करना चाहिए. कैसे राज्य की सत्ता को चलानी चाहिए. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी दूरदृष्टि से इसे प्रणामित कर दिया है. यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ विश्व के आर्थिक संपन्न देशों और भारत के अन्य प्रदेशों के समक्ष एक रोल मॉडल बनकर उभरा है.

सीएमआईई के सर्वेक्षण में प्रदेश में बेरोजगारी की दर 3.4 प्रतिशत

आपको यह जानकर हैरानी होगी और सभी को ये हैरानी हुई भी है कि लॉकडाउन के बीच किसी राज्य में ऐसा क्या कुछ हुआ कि वहाँ पर आर्थिक स्थिति न तो खराब हुई और न ही लोगों की नौकरियाँ गई. बल्कि हुआ ये कि बेरोजगारी दर ही घट गई. जी हाँ सौ फीसदी सच है ! क्योंकि वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से जहाँ देशव्यापी बेरोजगारी की दर में बढ़ोत्तरी हो रही है, वहीं छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है. ऐसी बात न तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी ओर से कह रहे हैं, न उनके मंत्रिमंडल के सदस्य, न सरकार की ओर से ये दावा किया गया है. ये बातें सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की ओर से जारी रिपोर्ट में कही गई है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की बेरोजगारी दर 12 महीने के सबसे निचले स्तर पर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो कि राष्ट्रीय बेरोजगारी की दर (23.5 प्रतिशत) से काफी कम है. सीएमआईई के द्वारा किये गए सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर सितंबर 2018 में 22.2 प्रतिशत थी, जो घट कर अप्रैल 2020 में 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है.


लॉक डाउन में भी छत्तीसगढ़ रोजगार उपलब्ध कराने में रहा सफल

आप जरा सोचिए आखिर ये कमाल कैसे हो गया ? आप अगर ऐसा सोच रहे हैं तो यह आपका सोचना जायज भी है. क्योंकि लॉकडाउन के दौरान देश में औद्योगिक गतिविधियां बंद हैं, जिससे देश की आर्थिक हालात पर गहरा असर पड़ा है. देशव्यापी बेरोजगारी दर में भी बेतहाशा वृद्धि हो रही है. लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके ठीक उलट हुआ है. छत्तीसगढ़ में लोगों को रोजगार भी मिला है और संकट का अत्याधिक प्रभाव भी नहीं पड़ा है.  इसका प्रमुख कारण हैें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने और ग्रामीणों की आजीविका को संरक्षित करने के लिए किए गए कार्य. देश में लागू लॉकडाउन के दौर में व्यापक स्तर पर भूपेश सरकार पर काम कर रही है. लॉकडाउन में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार देने में छत्तीसगढ़ अभी पूरे देश में प्रथम स्थान पर है. देशभर में मनरेगा कार्यों में छत्तीसगढ़ नंबर वन है.  यही नहीं लॉकडाउन की अवधि में कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है. किसानों को फसल बीमा और प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत लॉकडाउन की अवधि में अब तक 900 करोड़ रूपए की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है. इस अवधि में किसानों को राज्य शासन द्वारा खेती-किसानी के लिए आवश्यक छूट के साथ ही उनके उत्पाद के विक्रय की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है.


रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने की सराहना

कहीं किसी को कोई शंका अगर फिर भी है तो उसका समधान रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने बकायदा प्रेसवार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य का ज़िक्र करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य न सिर्फ़ अपनी अर्थव्यस्था को संभालने रखा, बल्कि आर्थिक विकास की दर को भी गतिशील बनाए रखा है. कोरोना संकट के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने बेहतर कार्य किया है. यही वजह है कि दूसरे राज्यों की तुलना में छत्तीसढ़ की आर्थिक स्थिति बेहतर है. किसी भी राज्य को चुनौतियों के बीच इसी तरह से आर्थिक ढाँचे को मजबूती के साथ और संतुलित तरीके से कर कार्य करना चाहिए.


वनांचल में राहत, आदिवासियों को मदद

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोरोना संकट के बीच वनांचल की स्थिति को भी बेहतर समझ रहे हैं. लिहाजा उन्होंने पहले ही यह तय कि आदिवासियों तक मदद प्राथमिकता से पहुँचाई जाएगी. आदिवासियों को इस कठिन समय में राहत देना जरूरी है. उनके पास रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं है. ऐसे में जो उनके जीविकापार्जन का सबसे बड़ा साधन है उसे व्यवस्थित ढंग से लॉकडाउन के बीच में जारी रखना होगा. लिहाजा उन्होंने लघु वनोपज के संग्रहण, खरीदी और बिक्री को जारी रखने का आदेश दिया. इसका असर ये हुआ कि वनांचल में आर्थिक संकट का असर नहीं दिखा. भूपेश सरकार ने महुआ फूल का समर्थन मूल्य 18 रुपए प्रतिकिलो से बढ़ाकर 30 रुपए किया गया है. प्रदेश में 25 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है. लघु वनोपजों की संग्रहण कार्य में भी वनवासियों को रोजगार के अवसर मिले हैं. लॉकडाउन के कारण संकट की इस घड़ी में सरकार द्वारा लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और नगद भुगतान की प्रक्रिया से वनांचल के वनवासी-ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है. “द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया” (ट्राईफेड) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देश में सर्वाधिक 90 फीसदी अधिक मूल्य की लघु वनोपजों की खरीदी की गई है. छत्तीसगढ़ के अलावा केवल दो राज्यों झारखण्ड और ओडिशा में लघु वनोपज की खरीदी का काम प्रारंभ हुआ है.

भूपेश बघेल का मॉडल देश के लिए रोल मॉडल बना

इसमें कोई दो राय नहीं कि छत्तीसगढ़ ने जिस मजबूती के साथ कोरोना संकट से लड़ाई की है, योजनाओं का सफल क्रियान्वय किया है, समय रहते निर्णय लिए हैं आज उसी का परिणाम है कि दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश में हाहाकार वाली स्थिति नहीं है. ये बात भले सही है कि अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में लौटें प्रवासी मजदूर भी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव निकल रहे हैं, लेकिन प्रदेश में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी अच्छी है. सबसे अच्छी बात ये भी है कि मरीज जल्दी स्वस्थ्य होकर लौट रहे हैं. किसी की मौत राज्य में अभी तक कोरोना संक्रमण से नहीं हुई यह भी अत्यंत सुखद बात है. इन तमाम स्थितियों के बीच यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी दूरदृष्टि, सकारत्मक निर्णय के बलबूते पर संकट के बीच राज्य को न सिर्फ़ बेहतर तरीके से संभाला, बल्कि प्रदेशवासियों को आर्थिक संकट से उबारने की दिशा में शानदार काम किया है. विशेषकर ग्रामीण छत्तीसगढ़ में आर्थिक ढाँचे को मजबूत रखने में भूपेश बघेल का मॉडल देश के लिए रोल मॉडल बना है.

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