रायपुर. छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) पर केन्द्रित ई-पुस्तक ‘GSTAT लिटिगेशन गाइड’ का विमोचन किया. लोक भवन, रायपुर से जारी इस ई-पुस्तक को देश भर के करदाताओं, विधि-व्यवसायियों और कर-प्रशासकों के लिए सारस्वत एसोसिएट्स के वेब-पोर्टल www.cggst.com पर पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है.

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यह ई-पुस्तक अधिवक्ता विवेक सारस्वत — छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण 2022 और बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार से सम्मानित और सारस्वत एसोसिएट्स के मुख्य अधिवक्ता द्वारा रचित है. इनके साथ सह-लेखकों के रूप में अधिवक्ता बीना सिंह गौतम, अधिवक्ता आस्था तिवारी और प्रियांश शर्मा का योगदान इस कृति को और अधिक सम्पूर्ण बनाता है.

भूमिका में राज्यपाल के उद्गार

राज्यपाल रमेन डेका ने इस ई-पुस्तक के लिए लिखी अपनी भूमिका (Foreword) में लिखा है — “न्याय तक पहुंच एक लोकतांत्रिक गणराज्य की आधारशिला है, और विधि-बिरादरी उसकी सर्वाधिक आवश्यक संस्था. GSTAT की स्थापना भारत की राजकोषीय विधिशास्त्र में एक ऐतिहासिक क्षण है — यह एक ऐसी संस्था का उदय है जो समूचे देश के करदाताओं को विशेषज्ञ, सुव्यवस्थित और समयबद्ध न्यायिक उपचार प्रदान करने का संकल्प लेकर आई है.”

राज्यपाल महोदय ने आगे अपनी भूमिका में लिखा है — “यह मार्गदर्शिका CGST अधिनियम 2017, CGST (प्रक्रिया) नियम 2017, GSTAT (प्रक्रिया) नियम 2025 के सुसंगत प्रावधानों को स्पष्टता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करती है और पूर्व-जमा की गणना, अंतरवर्ती आवेदनों और ई-फाइलिंग पोर्टल जैसे जटिल विषयों पर चरण-दर-चरण मार्गदर्शन देती है. मैं इसके Flip Pattern की विशेष सराहना करता हूं, जो भौतिक पुस्तक का-सा अनुभव प्रदान करता है.”

अपनी भूमिका में ई-पुस्तक की निःशुल्क उपलब्धता पर हर्ष व्यक्त करते हुए राज्यपाल महोदय ने लिखा — “मुझे विश्वास है कि इस ई-पुस्तक की निःशुल्क उपलब्धता देश भर में इसकी व्यापकतम पहुंच सुनिश्चित करेगी — चाहे वादी हों, अधिवक्ता हों, परामर्शदाता हों अथवा प्रशासक. मैं अधिवक्ता विवेक सारस्वत और समस्त सह-लेखकों को विधि-साहित्य में इस स्मरणीय योगदान के लिए हार्दिक बधाई देता हूं और इस कृति के चिरस्थायी प्रभाव की कामना करता हूं.”

पुस्तक की विशेषताएं

यह ई-पुस्तक GSTAT के समक्ष विधिक व्यवहार के उन सभी महत्त्वपूर्ण पहलुओं को समेटती है जिनकी जानकारी एक वादी और अधिवक्ता को अपेक्षित होती है. इसमें CGST अधिनियम 2017 और CGST (प्रक्रिया) नियम 2025 के प्रावधानों की विस्तृत विवेचना, पूर्व-जमा (Pre-deposit) की गणना, अंतरवर्ती आवेदन (Interlocutory Applications), ई-फाइलिंग पोर्टल की सम्पूर्ण प्रक्रिया और ‘फ्लिप पैटर्न’ के माध्यम से चरण-दर-चरण दिशा-निर्देश सम्मिलित हैं. इसकी सहज भाषा, सुव्यवस्थित संरचना और व्यावहारिक उपागम इसे विधि-जगत में एक संदर्भ ग्रंथ का दर्जा प्रदान करते हैं.

ई-पुस्तक की निःशुल्क उपलब्ध है : www.cggst.com (सारस्वत एसोसिएट्स, रायपुर, छत्तीसगढ़)