दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू सख्त GRAP-3 और GRAP-4 नियमों के बावजूद छतरपुर क्षेत्र में एक सरकारी संस्था द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया। NGT ने यह भी संकेत दिया कि नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय निवासी ने दर्ज की गंभीर शिकायत

छतरपुर निवासी शुभम वर्मा ने 22 नवंबर 2025 को ग्रीन दिल्ली ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) के ऑफिस परिसर में लगभग 80 वॉशरूम बनाने के लिए तोड़फोड़ और निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। शुभम वर्मा ने बताया कि यह काम GRAP (Graded Response Action Plan) के प्रतिबंधों के बावजूद जारी है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अवहेलना हो रही है।

शुभम वर्मा खुद एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस से पीड़ित हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य से निकल रही धूल उनकी केवल दो महीने की बेटी के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन रही है। इस वजह से वे अपनी बेटी से दूरी बनाए रखने को मजबूर हैं। शुभम ने उपचार पर हुए 7.11 लाख रुपये के खर्च की भरपाई के रूप में मुआवजा भी मांगा है। उनका यह भी आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

NGT का सख्त आदेश: 10 दिन में कार्रवाई

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) बेंच ने छतरपुर में जारी निर्माण मामले को गंभीर बताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसे उल्लंघन पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं। NGT ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को निर्देश दिया कि वह शिकायत की जांच करे, साइट का जमीनी सत्यापन करे और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो 10 दिनों के भीतर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करे। इसके साथ ही CAQM को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया। अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

यह मामला क्यों है अहम?

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में निर्माण से निकलने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनती है। इसी को नियंत्रित करने के लिए GRAP (Graded Response Action Plan) नियम बनाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी संस्थाएं भी इन नियमों का पालन नहीं करेंगी तो आम जनता का स्वास्थ्य खतरे में रहेगा। इस मामले में NGT की सख्त कार्रवाई और CAQM को आदेश देना प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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