छत्तीसगढ़ बीजेपी में लागू हो सकता है गुजरात फार्मूला ! राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश बोले, ‘गुजरात में जब मंत्रिमंडल बदल सकता है, तो किसी का भी नंबर लग सकता है, यह किसी की बपौती नहीं’

रायपुर। सत्ता वापसी की जद्दोजहद में जुटी छत्तीसगढ़ बीजेपी इन दिनों कई सवालों से जूझ रही है.सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव के पहले संगठन क्या कोई बड़ा बदलाव देखेगा? इन सवालों के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने संकेत दिए हैं कि नए चेहरों पर बीजेपी दांव लगा सकती है. युवा सम्मेलन में अपने भाषण में शिव प्रकाश ने गुजरात फार्मूले का जिक्र करते हुए दो टूक कहा, ” जब गुजरात में पूरा मंत्रिमंडल बदल सकता है, तो इसका मतलब यह है कि नए लोगों का नंबर लग सकता है. यह किसी की बपौती नहीं है”.

शिव प्रकाश के इस बयान के बाद चर्चाएं शुरू हो गई है कि चुनाव में कई बड़े चेहरे छांट दिए जाएंगे. राज्य का नेतृत्व जिन नेताओं के हाथों हैं, मुमकिन है कि बदलाव की जद में वह भी शामिल होंगे. बीजेपी को समझने वाले जानकार कहते हैं कि राजनीति में बीजेपी सर्वाधिक प्रयोग कर रही है. लोकसभा चुनाव के दौरान छत्तीसगढ़ की संसदीय सीटों के लिए जब उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाने केंद्रीय चुनाव समिति बैठी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य संगठन की सूची को सिरे से खारिज कर दिया था.

उस सूची में केंद्र सरकार में तबके मंत्री विष्णुदेव साय, सात दफे चुनाव जीत चुके रमेश बैस, राजनांदगांव लोकसभा सीट से सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले अभिषेक सिंह जैसे बड़े नाम भी शामिल थे, लेकिन फार्मूला दिया गया कि मौजूदा सांसद, हार चुके सांसद प्रत्याशी, मौजूदा विधायक, हार चुके विधायक प्रत्याशी और नेताओं के रिश्तेदारों को छोड़कर नए चेहरों की सूची लाई जाए. तब तमाम नेता सकते में आ गए थे. मोदी के फार्मूले ने नतीजे भी दिए. सूबे में कांग्रेस की मजबूत सरकार होने के बावजूद राज्य की 11 में से 9 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के एक नेता ने बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से कई गोपनीय सर्वे समय-समय पर किए जाते हैं. इन सर्वे के जरिए जिस तरह की रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंच रही है, यह राज्य संगठन का नेतृत्व कर रहे नेताओं के लिए ठीक नहीं है. बताते हैं कि नेताओं के आपसी टकराव का खामियाजा संगठन को भुगतना पड़ सकता है, लिहाजा इन तमाम पहलुओं पर चर्चा की जा रही है कि समय रहते एक ठोस रणनीति बना ली जाए. वरिष्ठ बीजेपी नेता कहते हैं कि मौजूदा तस्वीर बता रही है कि चुनाव में उम्मीदवारी तय करने की स्थिति में करीब 70 से 80 फीसदी नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है.

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