एसआर रघुवंशी, गुना। मध्य प्रदेश के गुना नगर पालिका परिषद में सियासी घमासान अब न्यायालय तक पहुंच गया है। नपा अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी समेत सात पार्षदों के विरुद्ध माननीय न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षद लगातार झूठे और मिथ्या आरोप लगाकर उनकी व्यक्तिगत छवि के साथ पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उपाध्यक्ष और कुछ पार्षद राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं। उनके अनुसार, ये पार्षद भाजपा की परिषद में कांग्रेस के कुछ सदस्यों के साथ मिलकर न केवल विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि जिला प्रशासन के समक्ष भी भ्रामक शिकायतें कर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में कलेक्टर न्यायालय में की गई शिकायतें जांच में असत्य पाई गई थीं और खारिज कर दी गई थीं।

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उपाध्यक्ष के खिलाफ पहले भी करा चुके हैं केस

अध्यक्ष ने यह भी बताया कि इससे पहले भी उन्होंने उपाध्यक्ष के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था, जिसे पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेताओं के आश्वासन पर वापस ले लिया गया था। उनका कहना है कि समझौते और आश्वासन के बावजूद आरोपों का सिलसिला नहीं थमा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वायरल वीडियो के माध्यम से भी उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई, जिसमें बयान देने वाले व्यक्ति ने पुलिस के समक्ष कथित रूप से स्वीकार किया था कि वीडियो फर्जी तरीके से तैयार कराया गया था। इसके बावजूद संबंधितों पर कार्रवाई नहीं हुई।

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न्यायालय से न्याय का विश्वास

अध्यक्ष का कहना है कि लगातार झूठे आरोपों और शिकायतों के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे एक महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता पर समय-समय पर नोटिस दिए गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व से अपेक्षित संरक्षण नहीं मिला, तब उन्हें न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा और सत्य सामने आएगा। इस घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह मामला न केवल परिषद की कार्यप्रणाली, बल्कि स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

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