कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। अच्छा शहर-अच्छा घर, हर कोई अपना खुद का आशियाना बनाने का सपना देखता है। इसी सपने और हकीकत के बीच धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां बस रही है। प्रशासन भी मुहीम चलाकर कार्रवाई का ढोल पीटता है लेकिन हकीकत कोसों दूर दिखाई पड़ती है।
मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियां मकड़जाल की तरह फैल रही है। प्रदेश में ये आंकड़ा 5 हजार पार कर गया है। सिर्फ चार महानगरों ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और भोपाल में किए गए सर्वे में ही 1586 के लगभग अवैध कॉलोनियों की पहचान हो चुकी है। ग्वालियर में 344 के लगभग अवैध कॉलोनी सामने आई है।
शहर के आम लोगो का भी कहना है कि कच्ची कॉलोनी और फार्म फोर कॉलोनी की रेट में काफी अंतर होता है। सस्ती कीमत और कम पूंजी में छोटा सा जमीन का टुकड़ा कच्ची यानी अवैध कॉलोनी में उनका हो जाता है। जबकि फार्म फोर कॉलोनी में मकान बनाना तो दूर मिडिल क्लास के लिए बढ़ती महंगाई के बीच उसे खरीदना भी संभव नही होता है। हालांकि कच्ची कॉलोनियों में निगम की कार्रवाई का डर हमेशा बना रहता है।
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के दावे को बीच की असली हकीकत
-प्रदेश में अवैध कॉलोनियां का आंकड़ा 5 हजार पार
-प्रदेश के चारों महानगर भोपाल ग्वालियर इंदौर और जबलपुर में हुए सर्वे में आंकड़ा 1586 पर पहुंच चुका
-साल 2016 से 2025 के बीच अवैध कॉलोनियों की संख्या दोगुनी हो चुकी है
-मध्य प्रदेश के अकेले ग्वालियर जिले में बीते 04 साल में 424 लेआउट TNCP से पास हुए
-ग्वालियर नगर निगम द्वारा सिर्फ 80 को अनुमति दी गयी
-इस लिहाज से 344 कॉलोनियां अवैध बसाई जा रही है
-कट ऑफ डेट के कारण भी अवैध कॉलोनी की बसाहट तेजी से बढ़ी
-तत्कालीन शिवराज सरकार में तीन बार कट ऑफ डेट बदली गई
-पहले 2016 तक की अवैध कॉलोनीयों को ही वैध करने की प्रक्रिया रखी गई
-आगे डेट 2020 फिर 31 दिसंबर 2022 तय की गई
अवैध कॉलोनी के सरकार द्वारा वैध किए जाने की उम्मीद के चलते साल 2016 से 2025 तक 150% के इजाफे के साथ अवैध कालोनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, टीएनसीपी से लेआउट पास करने के बाद नगर निगम से अनुमति न लेने की प्रवृत्ति के कारण आम लोग फॉर्म फोर कोलोनी समझ कर अवैध कॉलोनी में प्लॉट खरीद लेते हैं।
लोगों को इस तरह के धोखे से बचने के लिए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान का कहना है कि टीएनसीपी दो जगह के नक्शे पास करती है। इसमें शहरी और ग्रामीण शामिल होते हैं। टीएनसीपी और नगर निगम की कोआर्डिनेशन हमने ऑर्गेनाइज कराई है। उसके चलते टीएनसीपी से लेआउट पास होने की अनुमति जैसे ही पास होती है, नगर निगम अपनी पूरी प्रक्रिया करने की ओर आगे बढे, साथ ही पब्लिक डोमेन में इसकी जानकारी साफ हो।ताकि आम लोग फंसे नही।
अवैध कॉलोनियों की बसाहट की ग्रोथ को लेकर ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय का कहना है कि अवैध कॉलोनी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। 28 फरवरी तक का अभियान रखा गया था। उसमें 58 कॉलोनी चिन्हित की गई थी, जिन पर निगम की टीम ने विशेषकर 61 से 66 वार्ड तक कार्रवाई की है। टीएनसीपी से लेआउट की अनुमति को अकेले मान्य नहीं किया जा सकता। इसके आगे की भी निगम से अनुमति लेने की बहुत सारी प्रक्रिया का पालन करना होता है। तभी कॉलोनी मान्य होती है। ऐसे में आगे कार्रवाई जारी रहेगी।
फिलहाल प्रदेश के सभी जिलों के इन हालातों के बाद शासन सख्ती के मूड में है। जिसके तहत कार्य योजना बनाई जा रही है कि अवैध कॉलोनी बसाने के मामले में सजा और बड़ी राशि के जुर्माने के साथ कॉलोनाइजर के प्लॉट को बंधक बनाया जाए। इसके साथ ही उस कॉलोनी में डेवलपमेंट के लिए कॉलोनाइजर की संपत्ति को जब्त कर उसकी नीलामी के बाद मिली रकम से वह काम किया जाए। इस तरह के सख्त नियम बनाए गए तो शायद प्रदेश में अवैध कॉलोनी की बढ़ती हुई संख्या और उसके चलते स्थानीय प्रशासन पर व्यवस्थाओं के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन के बढ़ने वाले दबाव को खत्म किया जा सकेगा।
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