Hanuman Janmotsav 2026 : देश में हनुमान जी के अनेक चमत्कारी मंदिर है. चित्रकूट का हनुमान धारा उन्हें में से एक है, यहां हनुमान जी की पूछ पर निरंतर ठंडे पानी की धारा गिरती है. ऊंची पहाड़ियों से आने वाली यह जलधारा भगवान श्री राम के बाण से प्रकट हुई थी. पहाड़ की चोटी से आने वाली यह जलधारा बिना रुके गिरती रहती है. जिससे मंदिर का माहौल हमेशा शीतल बना रहता है. श्रद्धालु इस जल को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं और इसे पाताल गंगा कहा जाता है. यही अनोखी विशेषता इस मंदिर को बाकी तीर्थों से अलग बनाती है.

पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, लंका दहन के बाद हनुमान जी के शरीर में अत्यधिक ताप बढ़ गया था. तब भगवान राम ने उन्हें चित्रकूट के विंध्य पर्वत पर जाने की सलाह दी. यहां तप करने के बाद यह जलधारा प्रकट हुई, जिससे उनकी तपन शांत हुई. एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान राम ने अपने बाण से पर्वत से जल निकालकर हनुमान जी को शीतलता दी थी.
चढ़नी पड़ती हैं 618 सीढ़ियां
मंदिर तक पहुंचने के लिए 618 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, हालांकि अब रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है. रास्ते में करीब 150 सीढ़ियां ऊपर सीता रसोई पड़ती है, जहां वनवास के दौरान माता सीता ने ऋषियों को कंद-मूल और फल खिलाए थे. इसके अलावा, चित्रकूट से लगभग 18 किलोमीटर दूर गुप्त गोदावरी स्थित है.
भरत मिलाप मंदिर
यहां दो गुफाएं हैं. एक चौड़ी और ऊंची, दूसरी लंबी और संकरी, जिसमें हमेशा पानी बहता रहता है. मान्यता है कि यहां भगवान राम दरबार लगाते थे. इसी क्षेत्र में भरत मिलाप मंदिर भी है, जहां भगवान राम और भरत की भेंट हुई थी. यहां तक पहुंचने के लिए 360 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और रास्ते में राम, सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं.
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