उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मानव-जीव संघर्ष को लेकर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश से लंगूर, बंदर, भालू पकड़कर उत्तराखंड के जंगलों में छोड़े जा रहे हैं. यहां ऐसे बंदर और लंगूरों के झुंड उत्तराखंड में दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य तौर पर वहां नहीं पाए जाते. ऐसे में रावत ने कि इसका असर मानव जीव संघर्ष में बढ़ोतरी होने से आम जनता पर पड़ रहा है.

रावत ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लिखा है कि ‘अपने दिल्ली प्रवास के दौरान मुझे उत्तराखंड के संदर्भ में कुछ चिंताजनक और अजीब सी जानकारी मिली. जिसमें उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी ने बातचीत के दौरान बताया कि उत्तराखंड के अंदर उत्तर प्रदेश से लंगूर, बंदर और भालू पकड़कर जंगलों में छोड़े जा रहे हैं. ऐसे बंदर और लंगूरों के झुंड उत्तराखंड में दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य तौर पर वहां नहीं पाए जाते.’

इसे भी पढ़ें : उत्तराखंड UCC में बड़ा संशोधन: जबरन या धोखे से शादी-लिव-इन पर 7 साल की सजा, अध्यादेश लागू

रावत ने आगे लिखा कि ‘इसी तरह भालू भी भारी-भरकम, लंबे और छोटे बालों वाले देखे जा रहे हैं, जो उत्तराखंड की प्राकृतिक प्रजाति से अलग प्रतीत होते हैं. उत्तराखंड में सामान्यतः छोटे कद के और घने बालों वाले भालू पाए जाते हैं, जो आजकल ग्रामीण अंचलों में आतंक का पर्याय बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि, मैं यह जानकारी इसलिए साझा कर रहा हूं ताकि संबंधित लोग सतर्क होकर इस संभावना का आकलन कर सकें और भविष्य के लिए आवश्यक बचाव के उपाय किए जा सकें.’

रावत के इस आरोप का राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने खंडन किया है. उन्होंने कहा कि हरीश रावत को मनगढ़ंत आरोप नहीं लगाने चाहिए. सोशल मीडिया के जमाने में यह संभव नहीं है. अगर उनके पास कोई तथ्य है, तो इस पर सरकार जरूर कार्रवाई करेगी.