जिंदगी हर इंसान को प्यारी ही होती है. हर पल जीवन का कीमती माना जाता है, लेकिन गाजियाबाद के हरीश राणा की किस्मत कुछ और ही कहानी लिख रही थी. हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम अब हटा दिया गया है. उनकी दुनिया से विदा करने की तैयारी की जा रही है. इसी से जुड़ा एक बेहद भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी इस दुनिया से विदाई की तैयारी दिखाई देती है. सूत्रों के अनुसार, एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट से जुड़े दो प्रमुख पाइप हटा दिए गए हैं.
लगातार हालात पर नजर बनाए हैं डॉक्टर
जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों की निगरानी में यह प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ चरणबद्ध तरीके से की जा रही है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी हालत पर नजर बनाए हुए है. बताया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल और कानूनी दिशा-निर्देशों के तहत ही आगे बढ़ाई जा रही है.
निश्चित समयसीमा तय नहीं
सूत्रों का कहना है कि लाइफ सपोर्ट के कुछ उपकरण हटाए जाने के बाद अब आगे की स्थिति हरीश राणा के शरीर की प्रतिक्रिया और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करेगी. डॉक्टरों का मानना है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो सकती है, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मंजूरी दी है
गौरतलब है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु के तहत मरीज को जीवनरक्षक उपकरणों पर कृत्रिम रूप से जिंदा रखने वाली चिकित्सा सहायता धीरे-धीरे हटाई जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तों के साथ इस प्रक्रिया को कानूनी मंजूरी दी हुई है, जिसके तहत मरीज की स्थिति, परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्ड की अनुमति अनिवार्य होती है.
हादसे का हुए थे शिकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरीश राणा करीब 13 साल पहले चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान एक हादसे का शिकार हो गए थे. बताया जाता है कि वह हॉस्टल की इमारत से गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह कोमा जैसी स्थिति में चले गए. लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर में कई जटिल समस्याएं भी पैदा हो गईं.
परिवार ने सालों तक उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कहा कि उनके ठीक होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है. आखिरकार इसी स्थिति को देखते हुए परिवार ने अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और हालात को ध्यान में रखते हुए पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, ताकि हरीश को लंबे समय से चल रही पीड़ा से मुक्ति मिल सके.
क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया
इच्छामृत्यु उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी गंभीर और असाध्य बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को असहनीय पीड़ा से राहत दिलाने के लिए जीवनरक्षक इलाज वापस ले लिया जाता है. आम तौर पर इसे दो प्रकारों में बांटा जाता है-सक्रिय और निष्क्रिय. पैसिव यूथेनेशिया में मरीज के इलाज या लाइफ सपोर्ट को धीरे-धीरे हटाकर उसे प्राकृतिक रूप से जीवन की अंतिम अवस्था तक जाने दिया जाता है.
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