Flight Lieutenant Siddharth Yadav: हरियाणा के रेवाड़ी के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव को आज राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पैतृक गांव भालखी माजरा में उनके पिता सुशील यादव ने 28 साल के शहीद बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में शामिल होने शहीद सिद्धार्थ यादव की मंगेतर सानिया भी पहुंचीं। इस दौरान वह पार्थिव देह को देख रोती रहीं। सिद्धार्थ की तस्वीर देख सानिया बोली, “बेबी तू आया नहीं मुझे लेने. तूने कहा था तू आएगा। उनकी ये बात सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू ला दिया।

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फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव गुजरात के जामनगर में 2 अप्रैल को हुए जगुआर क्रैश में शहीद हुए थे। शहीद होने से पहले उन्होंने अपने साथी की जान बचाई थी। आज सुबह ही उनकी पार्थिव देह रेवाड़ी में उनके नए घर लाई गई। जिसके बाद काफिले की शक्ल में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई।

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सिद्धार्थ की 10 दिन पहले ही सगाई हुई थी। अंतिम संस्कार के मौके पर उनकी मंगेतर भी श्मशान घाट में पहुंची। इस दौरान वह पार्थिव देह को देख रोती रहीं। इस दौरान वह बार-बार रोते हुए कहतीं रही कि प्लीज एक बार मुझे उसकी शक्ल दिखा दो। मंगेतर सानिया ने कहा कि मुझे सिद्धार्थ पर गर्व है। सिद्धार्थ की शादी 2 नवंबर को होनी थी। जिसके लिए घर में तैयारियां भी चल रही थीं।

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मुझे अपने बेटे पर गर्व है- मां

शहीद की मां माता सुशीला यादव और बहन खुशी भी रोती रहीं। इस मौके मां सुशीला ने कहा, “मुझे अपने बेटे पर गर्व है। मैं देश की हर मां से कहना चाहती हूं कि वे अपने बेटों को देशसेवा के लिए सेना में भेजें। मुझे उसकी जननी होने पर गर्व है। वो देश के लिए डरा नहीं. मेरा पूरा परिवार सेना में था। ये जानते हुए भी मैंने उसे सेना में भेजा. मुझे उसकी शहादत पर गर्व है. रुंधे गले से कहा कि उसके नेचर का मैं नहीं बता सकती, वो कैसा था? सुशील यादव ने आगे कहा, “मेरी चार पीढ़ी सेना से रही हैं. मुझे यही बताया गया है कि वो अंतिम समय में इजेक्ट कर सकता था, लेकिन पब्लिक को बचाने के लिए ऐसा नहीं किया। वो बहादुर बच्चा था, हमेशा खुद को आगे रखने की कोशिश करता था।

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पिता बोले- चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनकर लौटे, यह सपना था

सिद्धार्थ के पिता सुशील यादव बोले कि उनका सपना था कि बेटा चीफ ऑफ एयर स्टॉफ बनकर ही घर आए। हर एयरफोर्स अधिकारी के पिता का यही सपना होता है, उनका भी यही सपना था। सिद्धार्थ घर से गया तो शादी के बारे में ही बात हुई थी। 2 नवंबर की शादी की तारीख निश्चित हुई थी। उसी को लेकर घर में तैयारियां चल रही थीं। मेरी चार पीढ़ी सेना से रही हैं। मुझे यही बताया गया है कि वो अंतिम समय में इजेक्ट कर सकता था लेकिन पब्लिक को बचाने के लिए ऐसा नहीं किया। वो बहादुर बच्चा था, हमेशा खुद को आगे रखने की कोशिश करता था।

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गुजरात में जगुआर क्रैश में शहीद हुए 

बता दें कि गुजरात के जामनगर में 2 अप्रैल को भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश में फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए थे। जगुआर में कुछ तकनीकी खराबी आई। जब यह तय हुआ कि जगुआर क्रैश होना तय है तो सिद्धार्थ ने अपने साथी मनोज कुमार को इजेक्ट कराया और विमान कहीं घनी आबादी में न गिरे, इसके लिए प्रयास शुरू किया। वह विमान को खाली जगह में ले गए और वीरगति को प्राप्त हुए थे।

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पिता ने बेटे की शादी के लिए नया घर बनाया था

शहीद सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव मूल रूप से रेवाड़ी के गांव भालखी माजरा के रहने वाले हैं। वह लंबे समय से रेवाड़ी में ही रह रहे हैं। बेटे की शादी के लिए ही उन्होंने सेक्टर-18 में घर बनाया था। इसी घर पर बेटे की शादी होनी थी। सिद्धार्थ बड़े बेटे थे। उनकी एक छोटी बहन हैं।

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2 नवंबर को होनी वाली थी शादी

फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव (Flight Lieutenant Siddharth Yadav) की 23 मार्च को उनकी सगाई हुई थी। 2 नवंबर की शादी तय हुई थी। हरियाणा के रेवाड़ी में उनके घर पर शादी को लेकर खुशी का माहौल था। सगाई और परिवार के साथ समय बिताने के बाद, 31 मार्च को वो ड्यूटी पर लौट गए थे। 2 अप्रैल को अपनी रूटीन ट्रेनिंग के दौरान, सिद्धार्थ भारतीय वायुसेना का एक ‘जगुआर लड़ाकू विमान’ उड़ा रहे थे। विमान में तकनीकी दिक्कतें आईं। सिद्धार्थ और उनके को-पायलट को कोई और रास्ता न दिखा। उन्हें अंदाजा हो गया था कि अब विमान क्रैश होने वाला है। उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि इस क्रैश से एयरफील्ड और स्थानीय लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।

सिद्धार्थ और उनके को-पायलट, विमान को घनी आबादी वाले इलाकों से दूर खुले मैदान की ओर ले गए। गुजरात के जामनगर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सुवरदा गांव में रात के करीब 9:30 बजे, ये विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

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