छात्रों की सेहत से खिलवाड़, दूषित पानी पीने को मजबूर 62 सरकारी स्कूल के बच्चे, दांत हो रहे पीले…

पुरुषोत्तम पात्रा,गरियाबंद. शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सेहत से किस तरह की खिलवाड़ हो रही है, इसका अंदाजा देवभोग ब्लॉक के 62 सरकारी स्कूलों से लगाया जा सकता है. यहां के बच्चे इस बार के शिक्षा सत्र में भी दूषित पानी ही पिएंगे. यहां के विद्यालयों का पानी पीने योग्य नहीं है,  इसका पता 10 महीने पहले ही चल गया था. फिर भी बच्चों के पीने के पानी का कोई विकल्प नहीं तलाशा गया.

बता दें कि 24 जून से शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है. ऐसे में साफ पानी का किसी भी तरह का कोई इंतजाम नहीं किया गया है. सबसे ज्यादा पूरनापानी स्कूल के हैंडपम्प में 6.12पीपीएम फ्लोराइड मिला है. यंहा पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के दांत पीले हो रहे हैं. बच्चों की ग्रोथ कम होने से भी पालको की चिंता बढ़ गई है.जानकारी के मुताबिक चिरायु दल के सर्वे रिपोर्ट में ये भी पता चल चुका है कि दूषित जल पीने वाले ढाई हजार से भी ज्यादा बच्चों के दांत पीले और हड्डियां कमजोर हो रही हैं  .

सुपेबेड़ा में दूषित जल से किडनी खराबी की घटना के बाद शासन ने यंहा के 140 स्कूलों के 75 वाटर सोर्स की जांच कराई थी मई 2018 में पीएचई विभाग के लेबोट्री ने जांच शुरु किया था तीन माह तक चली जांच के बाद रिपोर्ट चौकाने वाली सामने आई थी. पीएचई लेबोट्री ने 62 स्कूलों के उपयोग में आ रहे हैंडपम्प से निकलने वाले पानी को दूषित पाया. इन 62 हैंडपम्प में फ्लोराइड और आयरन की मात्रा अधिक पाई गई थी. तय मानक के मुताबिक फ्लोराइड की मात्रा 1.0 से 1.5 पीपीएम होनी चाहिए लेकिन यंहा के स्कूलों में 5 से 8 गुना ज्यादा इसकी मात्रा पाया गया. आयरन की मात्रा भी 4 से 6 गुना ज्यादा मिला.

 

रिपोर्ट के बाद पीएचई ने 62 हैंडपम्पो में लाल घेरा लगाकर उसे चिन्हाकित कर दिया था इस पानी को उपयोग नही करने की नसीहत भी दे दी थी ,लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करने के कारण दूषित पानी का ही उपयोग बच्चे लगातार कर रहे हैं. मामला को 10 माह से ज्यादा हो गया ,बावजूद इसके इस जटिल समस्या का समाधान प्रशासन ने नही किया है.

पीएचई के ईई फिलिप एक्का ने बताया कि, 62 स्कूलों में रिमूवल प्लांट स्थापना का प्रस्ताव बना कर शासन को भेजा गया है,स्वीकृति मिलते ही काम कराया जाएगा।दूषित जल स्रोत का चिन्हांकन कर उस सोर्स के पानी को पीने के इस्तेमाल में नही लाने स्कूलों को भी निर्देशित किया गया है. कुछ स्कूलों में नजदीकी सोर्स सही मिले है विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने कहा गया है.

 दांत पीले व हड्डियां कमजोर हो रही-

प्रभावित स्कूलों में अध्धयन करने वाले ढाई हजार  से भी ज्यादा बच्चों के दांत पीले पड़ गए है,हड्डियां भी कमजोर हुआ है,कईयों के ग्रोथ रूक गए है,इसकी पुष्टि साल भर पहले चिरायु दल ने किया था,यह दल ग्रामीण अंचल व स्कूलों में घूम कर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करता है,हार्ट या अन्य गम्भीर रोग से पीड़ित बच्चों का सरकारी खर्च पर उपचार कराति है,चूंकि हड्डि कमजोर व दांत पीले के इलाज का प्रावधान दल के पास नही है,इसलिय ये केवल इनकी जानकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उपलब्ध कराया था.

नंगलदेही स्कूल का पानी सबसे ज्यादा खराब-

जांच रिपोर्ट में नंगलदेही पीएस के हैंडपम्प में 9.30 पीपीएम फ्लोराइड मिला था,पीटा पारा,दरलीपारा, धूपकोट,गिरशूल के पांडे पारा,कड़लीमुडा, महूलकोट,कोदोबेड़ा,लदरा, गाडाघाट,कुशकोना,मूर्लिगुड़ा, चिचिया,पूरनापानी,नवागाव, धुगिया मूड़ा, ताड़ीपारा, समेत 28 स्कूल ऐसे है जंहा 3 पीपीएम से 6 पीपीएम तक फ्लोराइड की मात्रा मिली है।

जानकारी के बाद संज्ञान नही, दायर करेंगे याचिका-

देवभोग के अधिवक्ता घनश्याम पात्र और प्रकाश अवस्थी ने कहा कि जब तक प्रशासन की जानकारी में नही तब तक दूषित जल पी रहे थे,लेकिन जानकारी में आने के बाद भी कोई वैकल्पि ब्यवस्था नही करना शासन की लापरवाही है स्वास्थ्य से जानबूझकर खिलवाड़ एवं मूलभूत अधिकारों के हनन के दायरे में आता है,दस्तावेज एकत्र किया जा रहा,जल्द ही मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया जाएगा.

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