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प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश गौहत्या रोकथाम अधिनियम, 1955 के तहत दर्ज एक आरोपी को जमानत दे दी है. जस्टिस सौरभ लावानिया की सिंगल बेंच ने सोनू कसाई नाम के शख्स की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

गौतमबुद्धनगर जिले के थाना सेक्टर-58 में गौहत्या अधिनियम की धारा 3/5/8 के तहत मामले में जमानत की प्रार्थना के साथ आवेदक की ओर से जमानत अर्जी दाखिल की गई थी. आवेदक के वकील का तर्क था कि आवेदक एक निर्दोष व्यक्ति है और उसे मामले में झूठा फंसाया गया है. एफएसएल रिपोर्ट का आज तक इंतजार है, जिससे यह साबित करना जरूरी है कि कथित रूप से बरामद किया गया रेड मीट बीफ है. एकल गिरफ्तारी के आधार पर आवेदक को पांच मामलों में फंसाया गया है.

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आवेदक के आपराधिक इतिहास को पूरक हलफनामे में समझाया गया है, जिसे एजीए द्वारा विवादित नहीं किया गया है. ऐसे में आवेदक जमानत पर रिहा होने का हकदार है. यह भी प्रस्तुत किया गया था कि आवेदक कभी भी जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे और अभियोजन के साथ पूरा सहयोग करेंगे. याचिकाकर्ता ने कहा कि सह-आरोपी राशिद और सूरज प्रकाश और आसिम को अदालत पहले ही जमानत पर रिहा कर चुकी है. अदालत ने आवेदक को जेल से रिहा होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर ‘यूपी गौ सेवा आयोग, लखनऊ’ में 25,000 रुपए की राशि जमा करने को भी कहा है.