बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (CG High Court) का बड़ा फैसला सामने आया है। कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में आगे नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी गई है।

यह है मामला

वर्ष 2023 में करीब 6000 कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट में काफी भ्रष्ट तरीकों से प्रक्रिया संपन्न किए जाने के आरोप लगे थे। फिजिकल टेस्ट में डेटा रिकॉर्डिंग के लिए टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को शासन द्वारा आउटसोर्स नियुक्त किया गया था। आरोप है कि कंपनी द्वारा निष्पक्षता नहीं बरती गई और कई अभ्यर्थियों को पैसों के लेन-देन के माध्यम से अनुचित लाभ दिया गया।

इससे परिवेदित होकर जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी।

याचिका की सुनवाई 27 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि शासन द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट में स्वयं पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर ने स्वीकार किया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट में कई गड़बड़ियां की गईं और गलत डेटा दर्ज किए गए। यहां तक कि टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा CCTV फुटेज भी डिलीट किए गए हैं।

शासन द्वारा कार्रवाई में कुल 129 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें अनुचित लाभ देते हुए ज्यादा अंक प्रदान किए गए थे। पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 में साफ-साफ दर्शित है कि अगर पुलिस भर्ती प्रक्रिया में कोई भी अनियमितता पाई जाती है, तो भर्ती प्रक्रिया को संपूर्ण रूप से रद्द किया जाएगा और नई भर्ती प्रक्रिया कराई जाएगी।

इसी प्रकार चयन प्रक्रिया का समापन, अंतिम सूची का जारी होना और नियुक्ति आदेश का प्रकाशन गैरकानूनी है तथा पुलिस भर्ती नियम 2007 के प्रावधानों के विरुद्ध है। यह कि याचिकाकर्ताओं का यह भी कथन रहा है कि यह जो प्राइवेट इंडिपेंडेंट एजेंसी टाइम्स टेक्नोलॉजी है, जिसने फिजिकल टेस्ट कराया है, जिसमें लंबी कूद और भाला फेंक सहित जो भी फिजिकल एक्टिविटीज हैं, उनमें गंभीर अनियमितता हुई है।

अगर जांच किसी इंडिपेंडेंट एजेंसी या सीबीआई से होगी, तो यह भी तथ्य सामने आएंगे कि सभी जिलों में न केवल गंभीर अनियमितता हुई है, बल्कि काफी बड़ा भ्रष्टाचार भी हुआ है। जो कांस्टेबल चयनित हुए हैं और याचिकाकर्ताओं जैसे मेरिटोरियस कैंडिडेट्स का चयन नहीं हो पाया है। अगर हर जिले में चयन समिति के अध्यक्ष एवं पुलिस अधीक्षक सही तरीके से जांच करते, तो यह जो गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, वे सामने आती है।

अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने राज्य को अगली सुनवाई की तारीख तक कांस्टेबल पद के लिए आगे कोई नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगाते हुए उत्तरवादीगण को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।