बिलासपुर। आबकारी मुख्य आरक्षक के पद पर पदस्थ गौरेला निवासी मुकेश शर्मा की याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई की. अधिवक्ता के ACR में प्रतिकूल टिप्पणी अंकित करने के पूर्व याचिकाकर्ता को निर्धारित समयावधि के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी ना किए जाने के तर्क सही मानते हुए सब-इन्सपेक्टर पद पर प्रमोशन देने का आदेश दिया.
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता को ACR में प्रतिकूल टिप्पणी होने के कारण सब-इन्सपेक्टर पद पर प्रमोशन से वंचित कर दिया गया था. इससे क्षुब्ध होकर मुकेश शर्मा ने हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की.

अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा देवदत्त विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य, रूखसाना शाहीन खान विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं आर.के. जीवनलता देवी विरूद्ध हाईकोर्ट ऑफ मणिपुर के वाद में यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया कि किसी शासकीय कर्मचारी के ACR में प्रतिकूल टिप्पणी अंकित करने के पूर्व उसे निर्धारित समयावधि के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी ना किये जाने पर प्रतिकूल टिप्पणी स्वतः ही समाप्त हो जाती है.
विभागीय भर्ती परीक्षा में याचिकाकर्ता को 200 में से 172 अंक प्राप्त हुए, जबकि अंतिम चयनित अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवार कीर्ति ठाकुर को 175 एवं राहुल सिंह बघेल को 177 अंक मिला. अतः यदि याचिकाकर्ता को 3 अतिरिक्त अंक प्रदान किये जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता आबकारी उपनिरीक्षक पद पर प्रमोशन का पात्र है.
उच्च न्यायालयने रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् अधिवक्तागण के तर्कों से पूर्ण रूप से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्याय दृष्टांत इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2005 में जारी सर्कुलर के तहत इस आधार पर की याचिकाकर्ता ACR में अतिरिक्त अंक प्राप्त कर चयन का हकदार है. इस आधार पर मामले का नियमानुसार निराकण कर आवेदक को आबकारी उपनिरीक्षक के पद पर प्रमोशन प्रदान करने का आदेश दिया.
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


