वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक अनुसंधान अधिकारी के डिमोशन आदेश पर रोक लगा दी है।आदिम जाति विकास विभाग रायपुर में सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदस्थ मीनाक्षी भगत को छत्तीसगढ़ शासन के आदेश 31 दिसंबर 2025 के तहत सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर डिमोशन किए जाने के खिलाफ न्यायालय ने डिमोशन आदेश पर रोक लगाते हुए उत्तरवादियों को नोटिस जारी किया है।

मीनाक्षी भगत की नियुक्ति सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर वर्ष 2008 में हुई थी। विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची में मीनाक्षी का नाम वरीयता क्रम में प्रथम होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें उपयुक्त पाते हुए पदोन्नति की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने दिसंबर 2022 में मीनाक्षी भगत की पदोन्नति सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर किया था, किंतु उपरोक्त विभाग के अन्य अनुसंधान सहायकों ने न्यायालय में मीनाक्षी भगत के प्रमोशन और विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा को चैलेंज करते हुए याचिका दायर की थी। साथ ही विभाग के समक्ष सामूहिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था।

विभाग ने प्रस्तुत अभ्यावेदन का परीक्षण किया, जिसके उपरांत पाया कि वर्ष 2016 एवं 2020 में विभाग द्वारा सहायक अनुसंधान अधिकारी/सहायकनियोजन अधिकारी/सहायक सांख्यिकी अधिकारी के लिए संयुक्त सूची तैयार किया गया था। दोनों संवर्ग की संयुक्त सूची तैयार कर अधिकारियों का चयन किया गया था। संयुक्त सूची तैयार करते हुए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक दिनांक 28 दिसंबर 2022 की बैठक की पुनरीक्षित बैठक 11 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई। विभागीय पदोन्नति समिति ने बैठक में समिति द्वारा मीनाक्षी भगत के नाम पर विचार करते हुए संवर्ग में पद रिक्त नहीं होने से अनुशंसा पद नहीं होने के कारण सहायक अनुसंधान अधिकारी से सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर डिमोशन करने का आदेश पारित किया गया, जिससे क्षुब्ध होकर मीनाक्षी भगत ने हाईकोर्ट अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीपी साहू के यहां हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी द्वारा यह आधार लिया गया कि याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत का प्रमोशन सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर दिसंबर 2022 में हुई थी। तब से लेकर आज तक वह इस पद में नियमित रूप से कार्य करते हुए आ रही थी, किंतु विभाग द्वारा बिना कोई सूचना के डिमोशन किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत उपरोक्त आधारों पर न्यायालय ने आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी डिमोशन आदेश 31 दिसंबर 2025 के क्रियान्वयन पर रोक लगाई और उत्तरवादीगणो को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।