28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित असर के मद्देनजर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की बैठक बुलाई। राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जबकि केंद्र सरकार ईरान युद्ध को लेकर कई बैठकें कर चुकी है। साथ ही लोगों को यह भरोसा भी दिलाया जा रहा है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है। विदेश मंत्रालय हालात पर नजर बनाए हुए है साथ ही पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों को भी हरसंभव मदद देने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्रियों और केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया के हालात और उसके संभावित प्रभावों के मद्देनजर राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई थी।

PM मोदी ने CMs संग की बात

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर उसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों और उप राज्यपालों के साथ एक बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। इस दौरान, पीए मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए अहम सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ये सुझाव उभरती स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भावी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारियों और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

पीआईबी के मुताबिक, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास इस तरह के वैश्विक व्यवधान से निपटने का पहले का अनुभव है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए सामूहिक प्रयासों को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने ‘टीम इंडिया’ के रूप में मिलकर आपूर्ति शृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर प्रभाव को कम करने के लिए काम किया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यही सहयोग और समन्वय की भावना वर्तमान परिस्थितियों से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

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