History Of Turkman Gate: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के फैज-ए-इलाही मस्जिद के स्थित ऐतिहासिक तुर्कमान गेट एक बार सुर्खियों में है। फैज-ए-इलाही दरगाह (faiz-e-ilahi mosque) के बाहर अवैध निर्माण हटाने के दौरान दिल्ली के तुर्कमान गेट (Turkman Gate) के पास 6-7 जनवरी की आधी देर रात भारी बवाल हुआ। कथित मुस्लिम उपद्रवियों ने अवैध निर्माण हटाने पहुंची दिल्ली पुलिस-MCD टीम पर जमकर पथराव किया। इसके बाद तुर्कमान गेट एक बार फिर से देश में चर्चा का केंद्र बिंदू बन गया है।
तुर्कमान गेट सिर्फ एक ऐतिहासिक दरवाजा नहीं, बल्कि दिल्ली के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक संघर्षों का गवाह रहा है। 1975 के आपातकाल से लेकर 2025 का अतिक्रमण विवाद हर बार ये टकराव का केंद्र बना है।
तुर्कमान गेट मुगल बादशाह शाहजहां की तरफ से बसाए गए शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) के प्रमुख दरवाजों में से एक है. 17वीं शताब्दी में बने इस गेट का निर्माण उस दौर में हुआ था, जब दिल्ली एक मजबूत किलेबंद राजधानी के रूप में विकसित की जा रही थी। इस गेट का नाम प्रसिद्ध सूफी संत शाह तुर्कमान के नाम पर पड़ा, जिनकी दरगाह गेट के पास स्थित है। यहां शाह तुर्कमान की याद में हर साल उर्स का आयोजन होता है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यह इलाका सदियों से आबाद रहा है। तुर्कमान गेट की बनावट की बात करें तो ये एक आयताकार संरचना है। इसमें तीन मेहराबी प्रवेश द्वार समेत दो मंज़िला बुर्ज है। यह मुगल कला का एक अहम उदाहरण माना जाता है।

पहली बार कब चला था तुर्कमान गेट पर बुलडोजर?
तुर्कमान गेट का नाम पहली बार बड़े स्तर पर 13 अप्रैल 1976 में चर्चा में आया था, जब आपातकाल के दौरान बुलडोजर चला था। तत्कालीन समय पर संजय गांधी के निर्देश पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर झुग्गी हटाओ अभियान चलाया गया था। तुर्कमान गेट इलाके में पहली बार बुलडोजर पहुंचा ता। शुरुआत में झुग्गियां हटाई गईं, जिसका सीमित विरोध हुआ था।
संजय गांधी के इस फैसले ने पूरे पुरानी दिल्ली को आंदोलित कर दिया था। जामा मस्जिद, चांदनी चौक और तुर्कमान गेट. इन इलाकों में गुस्सा और असंतोष फैल गया था। मजदूर संगठनों और वामपंथी दलों ने विरोध को संगठित किया। यह विरोध जल्द ही हिंसक रूप लेने लगा। 19 अप्रैल 1976 को तुर्कमान गेट संघर्ष का मैदान बन गया। हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए. बुलडोजर दोबारा आगे बढ़े, लोग सड़कों पर उतर आए, तब दोजाना हाउस पर हमला हुआ। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे।
औरंगजेब से क्या है संबंध
अक्सर यह सवाल उठता है कि औरंगजेब का तुर्कमान गेट से क्या संबंध है? इसका कोई सीधा संबंध अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि, तुर्कमान गेट का निर्माण शाहजहां के शासनकाल में हुआ और औरंगजेब, शाहजहां का पुत्र था। इस वजह से गेट का औरंगजेब से कोई सीधा या ऐतिहासिक संबंध नहीं है। यह भ्रम अक्सर सोशल मीडिया और अधूरी ऐतिहासिक जानकारी के कारण फैलता है।

2025 में फिर क्यों चर्चा में आया तुर्कमान गेट?
करीब पांच दशक बाद तुर्कमान गेट एक बार फिर सुर्खियों में है। इसका कारण फैज-ए-इलाही मस्जिद और अतिक्रमण है। फैज-ए-इलाही मस्जिद ऐतिहासिक तुर्कमान गेट के पास स्थित है। इसके आसपास सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर कई इमारतें बना दी गईं है। अदालत ने ऐतिहासिक ढांचे के आसपास हुए अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया। 6 जनवरी 2025 को फिर से बुलडोजर चला, जिसके बाद बवाल खड़ा हो गया। MCD और पुलिस की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची। इसको देखते हुए स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते पत्थरबाजी होने लगी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
यह भी पढ़ेंः- ‘एक मूर्ख की वजह से देश इतना नुकसान नहीं झेल सकता…,’ किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर करारा वार, बोले- अब हर बिल पास कराएगी सरकार
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


