Holashtak 2026 : होलाष्टक की शुरुआत आज 24 फरवरी, मंगलवार से हो चुकी है. इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य को वर्जित माना जाता है. इसके पीछे दो पौराणिक कथाओं को माना जाता है जिसमें से एक प्राचीन काल में महादेव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था. जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया और आठ दिनों तक ग्रह उग्र स्थिति में आ गए थे. तभी से होलाष्टक की परंपरा मानी जाती है. एक अन्य कथा हिरण्यकश्यप, होलिका और प्रह्लाद से जुड़ी है. इसके बाद होलिका का दहन किया जाता है और होली मनाई जाती है.

होलाष्टक के 8 दिन क्या नहीं करना चाहिए?

मान्यता है कि इन 8 दिनों में शादी विवाह, सगाई, नामकरण, मुंडन सहित 16 संस्कार नहीं करने चाहिए. नया वाहन, प्रॉपर्टी, मकान खरीदना या नया बिजनेस शुरू करना भी शुभ नहीं माना जाता. गृह निर्माण और गृह प्रवेश से भी होलिका दहन तक बचना चाहिए. ज्योतिष मान्यता के अनुसार नौकरी बदलने से परहेज करना चाहिए यदि आवश्यक होने पर कुंडली दिखाकर सलाह ली जा सकती है. हवन और यज्ञ जैसे कार्य भी वर्जित माने गए हैं.

इन 8 दिनों में क्या करना चाहिए?

इन 8 दिनों जप, तप और ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है. फिर आठ दिनों में भगवान विष्णु हरि की पूजा कर ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है. साथ ही शिव आराधना और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र जप का भी महत्व बताया गया है. ग्रह शांति के लिए ज्योतिषी की सलाह से उपाय किए जा सकते हैं.