बस्तर में पढ़ने वाला युवक कैसे बना आईएएस अधिकारी, बताई अपने संघर्ष की कहानी

रायपुर। हमे असफलता से कभी हारना नहीं चाहिए लगातार प्रयास करना चाहिए। हारते वह है जो प्रयास करना छोड़ देते हैं। मै भी कई बार असफल होने के बाद सफल बना।

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उक्ताशय के विचार आज “संघर्ष करना सीखो” विषय पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित एक वेबीनार में रायपुर के अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी विनीत नंदनवार ने व्यक्त किए। प्रदेश के तीन हजार से भी अधिक लोगो ने उन्हें सुना। उन्होंने रायपुर, बस्तर व सरगुजा संभाग के बच्चों से सीधा संवाद कर उनके प्रश्नों के जवाब भी दिए। यह उल्लेखनीय है कि जिस बस्तर हाई स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की वहां के शिक्षकों व बच्चों ने उनसे ऑनलाईन बातचीत की। इससे दोनो तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। इस वेबीनार में स्टेट मीडिया सेंटर के नोडल अधिकारी प्रशांत पाण्डेय, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के उप सचिव जे. के. अग्रवाल व शिक्षा सलाहकार सत्यराज अय्यर विशेष रूप से उपस्थित थे।

उन्होंने बताया कि उनका जन्म महारानी अस्पताल जगदलपुर में हुआ। बस्तर हाई स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा व धरमपुरा काॅलेज में स्नातक हिन्दी माध्यम से हुई। सेंटबोरिस का अर्थ सरकारी स्कूल के चटाई में बैठकर पढ़ाई की। वर्ष 2004 में शिक्षाकर्मी के साक्षात्कार में फेल हो गए। उन्होंने कहा कि असफला से हम कभी हारते नहीं है, हारते वह है जो प्रयास करना छोड़ देते है। सफल व्यक्ति आंतरिक रूप से हमेशा प्रेरित होते रहते है। किसी भी सफलता के लिए मार्गदर्शक होना आवश्यक है। एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा, फिर तीसरी योजना में कार्य करना चाहिए। तीन बार आईएएस की परीक्षा में फेल हुए, फिर भी लगातार पाँच वर्षों से लगातार दस-बारह घंटे पढ़ाई किया फिर वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस बने।

उन्होंने आगे बताया कि सफलता के लिए सपने देखना होगा, बशर्ते सपने शेख चिल्ली जैसे न देखे। धैर्य बनाकर सही समय, सही दिशा में सार्थक प्रयास से सफलता अवश्य हासिल होगी। सतत् रूप से पढ़ाई करें। सुबह के समय दिमाग सबसे सक्रिय रहता है सुबह के समय पढ़ाई करें। अपने सबसे अच्छा समय का उपयोग करें। सतत् रूप से एक कार्य को लगातार न करें जबकि संघर्ष विराम फिर संघर्ष के सूत्र पर कार्य करें। विषय की समझ नहीं, विषय की स्पष्ट समझ विकसित करें। दस किताब पढ़ने के स्थान पर एक किताब को दस बार पढ़े, क्या पढ़ना आवश्यक और क्या छोड़ना है इसे आवश्यकता के आधार पर प्राथमिकता प्रदान करें। रात में अथवा सुबह दिनभर के समय के लिए कार्ययोजना बनाएं फिर शाम को उसका आत्म मूल्यांकन करें। गलतियों को सुधारियें, गलतियों को बार बार न दोहराएं।

सोच को बदलो तो सितारे बदल जाएंगे, नजर को बदलो तो नजारे बदल जाएंगे।
कस्ती बदलने की जरूरत नहीं है केवल दिशा बदल दो तो किनारा बदल जाएंगे।

स्टेट मीडिया सेंटर के नोडल अधिकारी प्रशांत पाण्डेय ने नंदनवार का परिचय कराते हुए इस वेबीनार का संचालन किया। शिक्षा सलाहकार सत्यराज अय्यर ने बच्चों से साक्षात्कार कराया। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के उप सचिव जे. के. अग्रवाल ने आभार प्रदर्शन किया।

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