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प्रदेश में कोरोना संक्रमण तेज़ी से पैर पसार रहा है. राजधानी रायपुर प्रदेश का कोरोना हॉट स्पॉट बना हुआ है. राजधानी में कोरोना से निर्मित हालात को जनता तक पहुँचाने के लिए लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने कोरोना के दूसरे दौर के अनुभव एवं जनता के सवाल को लेकर पड़ताल किया.

वर्तमान समय में रायपुर में सबसे ज़्यादा मरीज़ मिल रहे हैं ऐसे हालात में 8253 एक्टिव मरीज़ है जिसमें से लगभग 95% मरीज़ होम आइसोलेशन में इलाज ले रहे हैं, आज की स्थिति में 291 मरीज़ कोविड सेंटर, अस्पताल में भर्ती है, जिसमें से 20 मरीज़ वेंटिलेटर में हैं इस तरह 5% मरीज़ हॉस्पिटल पहुँचे हैं,

दूसरी लहर की अपेक्षा क्या तीसरी लहर में मौत ज़्यादा हो रही है या कम ?

राजधानी में पिछले 15 दिनों में 16 मौत हुई है जिसमें से 14 मौत को मार्बिलिटी दो मौत कोविड से हुई है, जिसमें एक मौत इलाज देरी में मिलने के कारण हालात बिगाड़ने के बाद मरीज़ हॉस्पिटल पहुँचा मरीज़ पहले एंटीजेन भी टेस्ट कराया था, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई थी, जिसके बाद धीरे-धीरे हालत बिगड़ी और मौत हो गई. इस तरह दूसरी लहर की अपेक्षा तीसरी लहर में मौत का आंकड़ा कम है, रिकवरी रेट ज्यादा है.

जो मौत हो रही है उसमें पुरुषों की संख्या ज़्यादा है या महिलाओं की?

दूसरी लहर में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की ज़्यादा मौत हुई है. ठीक इसी तरह तीसरी लहर में भी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की ज़्यादा मौत हो रही है. जो पंद्रह दिन में 16 मौत हुई है, उसमें से 11 पुरुष हैं, तो 5  महिलाएं हैं.

जिन लोगों की मौत हुई है उन मरीज़ों को क्या टीका लगा था?

सीएमएचओ डॉक्टर मीरा बघेल ने बताती हैं कि जिन 16 मरीज़ों की मौत हुई है, उसमें से 7 लोगों को वैक्सीन नहीं लगा था, जिसमें दो साल का बच्चा भी शामिल है. इन दो लोगों को छोड़कर सभी अलग-अलग गंभीर बीमारी के मरीज़ थे. कोई डायलिसिस में थे, तो किसी की किडनी ख़राब थी. दो लोगों की मौत इलाज में देरी होने के कारण हुई है. एक मरीज़ एंटीजेन टेस्ट कराया था, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई थी, उसके बाद उसकी हालत बिगड़ती गई. फिर स्थिति बिगड़ने के बाद हॉस्पिटल पहुँचे हालात ज़्यादा ख़राब होने के कारण मौत हो गई. तो वहीं दूसरी मौत महिला की थी, जिसकी इलाज के दौरान हार्ट अटैक आया था, बाहर से आने वाली इस महिला को टीका नहीं लगा था.

इलाज के लिए राजधानी में क्या-क्या व्यवस्था है ?

वर्तमान समय में रायपुर में सरकारी और प्राइवेट बेड मिलाकर 4950 है जिसमें नॉर्मल बेड 637 है, ऑक्सीजन बेड 2664 है, HDU- 530, ICU- 700, वेंटिलेटर बेड 449 है.

वैक्सीनेशन कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे कारगर

जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल ने बताया कि टीका कोरोना जंग के सबसे बड़ा हथियार है जितना जल्दी हो सके वैक्सीन लगवाएं, इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्था है, बेड लगातार तैयार किए जा रहे हैं, वर्तमान समय में मौजूदा बेड में 95 प्रतिशत बेड ख़ाली है. पाँच प्रतिशत ही मरीज़ को हॉस्पिटल पहुँच रहे हैं, वो ऐसे लोग हैं, जिनके घरों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. वेंटिलेटर में 20 मरीज़ हैं. रिकवरी रेट अच्छी है.