आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर में हवाई सेवाओं के विस्तार की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई आज भी सवालों के घेरे में है. जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट आज भी अधूरे रनवे और अधूरी प्रक्रियाओं का प्रतीक बना हुआ है. बस्तर जैसे आदिवासी और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले क्षेत्र के लिए हवाई सेवाएं विकास की रीढ़ मानी जाती हैं, लेकिन बस्तर में यह रीढ़ आज भी कमजोर है.
जगदलपुर का मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जहाज भाटा के रूप में विकसित किया गया था, आज भी उसी दौर की बुनियादी संरचना से जूझ रहा है. आज़ादी के बाद से अब तक एयरपोर्ट के रनवे की रिकार्पेटिंग का काम एक बार भी पूरी तरह नहीं हो पाया है. रनवे जर्जर होने की वजह से बड़े कमर्शियल विमानों की लैंडिंग संभव नहीं हो पा रही है. नतीजतन, जगदलपुर एयरपोर्ट केवल ATR जैसे छोटे रीजनल विमानों तक ही सीमित रह गया है. हवाई सेवाओं के विस्तार की हर घोषणा रनवे पर आकर थम जाती है.

रनवे रिकार्पेटिंग के लिए कुल 25 करोड़ रुपए की आवश्यकता बताई गई है. राज्य सरकार की ओर से पहले 11 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका. अब एक बार फिर 14 करोड़ रुपए और जारी किए गए हैं, जिससे कुल राशि पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद PWD विभाग की टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है. यानी पैसा होने के बावजूद काम कागज़ों में अटका हुआ है.
इधर बस्तर में पर्यटन गतिविधियां बढ़ रही हैं, देश-विदेश से लोग बस्तर की संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य देखने आ रहे हैं..पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि सिर्फ रनवे ही नहीं, एयरपोर्ट की विजिबिलिटी भी एक बड़ी समस्या है. खराब मौसम या देर शाम होते ही फ्लाइट सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं. यदि.विजिबिलिटी सुधार और रनवे रिकार्पेटिंग का काम पूरा हो जाए, तो बस्तर में नियमित और भरोसेमंद हवाई सेवाएं संभव हो सकती हैं.

स्थानीय निवासी शैलेंद्र बताते है कि अगर रनवे और विजिबिलिटी की समस्या दूर हो जाए, तो बस्तर में पर्यटन और व्यापार दोनों को बड़ा फायदा होगा. वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि अब देरी नहीं होगी और प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी. राशि आवंटित हो चुकी है, PWD विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करेगा, इसके बाद रनवे रिकार्पेटिंग का काम शुरू किया जाएगा. शासन और प्रशासन दोनों स्तर पर एयरपोर्ट के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं.
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