यूरोपीय परिषद के दो दिग्गज नेता इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। मंगलवार को यूरोपीय परिषद और भारत के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील साइन हुई। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी के बाद यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने संबोधन दिया। इस संबोधन के दौरान कोस्टा ने अपनी जेब से भारतीय पासपोर्ट निकालते हुए कहा कि मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं।

अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा कि जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, मेरे लिए इसका विशेष महत्व है। मुझे गोवा में अपनी जड़ों पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था और यूरोप और भारत के बीच का संबंध मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत मायने रखता है।

प्रेस वार्ता करते हुए एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि बहुध्रुवीय दुनिया में यूरोपीय संघ और भारत साझा समृद्धि के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा के बिना समृद्धि संभव नहीं है। अपने नागरिकों और साझा हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए सहयोग को मजबूत करें।

कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र, यूरोप और दुनिया भर में हमारे सामने मौजूद सभी प्रकार के सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करें। हमारे बीच रणनीतिक विश्वास के एक नए स्तर तक पहुंचें। यही हमारे सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते का महत्व है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस तरह का पहला व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचा।

कोस्टा ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। सदियों से हमारे दोनों महाद्वीपों के बीच व्यापार होता रहा है। व्यापार एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिरता कारक और आर्थिक विकास का मूल स्रोत है। व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। इसीलिए आज का मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है, जो 2 अरब लोगों के बाजार का निर्माण करता है।

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