I love Mahadev or I love Mohammed In BMC Election: मुंबई नगर निगम चुनाव यानी बीएमसी चुनाव (BMC elections) में विकास का मुद्दा अब धर्मों के ध्रुवीकरण पर आकर अटक गया है। बीजेपी नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन जहां ‘हिंदू-मराठी मेयर’ बनाने का दांव चला रहा है। वहीं महाविकास अघाड़ी-MNS ‘मराठी मेयर’ का दावा कर रही है। अब इसमें एआईएमआईएम (AIMIM) भी कूद पड़ी है। एआईएमआईएम ने ‘मुस्लिम महिला मेयर’ का मुद्दा उठाया है। एआईएमआईएम नेता वारिस पठान (Waris Pathan) ने पूछा है कि कोई मुस्लिम मेयर क्यों नहीं बन सकता? उन्होंने कहा कि कहा कि हमारा सपना है कि कलमा पढ़ने वाली मुस्लिम महिला मुंबई की मेयर बने। वारिस पठान के इस बयान के बाद बीएमसी चुनाव में मुंबई मेयर (Mumbai Mayor) के लिए ‘उत्तर भारतीय बनाम मराठी’ से ‘आई लव महादेव’ या ‘आई लव मोहम्मद’ मेयर की लड़ाई तेज हो गई है।

मुंबई नगर निगम चुनाव में आई लव महादेव या आई लव मोहम्मद के बीच आइए जानते हैं कि क्या मुंबई में कभी कोई मुसलमान मेयर बना है? अगर बना है तो पहला मुस्लिम मेयर कौन था और अबतक कितने मुंबई के मुस्लिम मेयर बने हैं।

छह मुस्लिम मेयर रह चुके हैं

मुंबई नगर निगम के इतिहास को देखें तो यहां छह मुस्लिम मेयर रह चुके हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा मुंबई के मुस्लिम सोशलिस्ट मेयर यूसुफ मेहरअली को याद करते हुए लिखते हैं कि यहां छह मुस्लिम मेयर रह चुके हैं। पहला मुस्लिम मेयर 1934 में बना था और आखिरी मुस्लिम मेयर 1963 में बना था, हालांकि उसके बाद कोई मुस्लिम मेयर नहीं बना है। यूसुफ मेहरअली अप्रैल 1942 में बॉम्बे के मेयर चुने गए थे। उसी साल अगस्त में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया था। मेयर के तौर पर, मेहरअली को महात्मा गांधी का औपचारिक स्वागत किया था।

ब्रिटिश काल के दौरान सबसे पहले मेयर जेबी बोमन-बेहराम थे

मुंबई नगर निगम में ब्रिटिश काल के दौरान सबसे पहले मेयर 1931 से 1932 तक सर जेबी बोमन-बेहराम थे। देश जब स्वतंत्र हुआ था, उस समय 1946 से 1947 तक एमआईएम रौजी और 1947 से 1948 के दौरान एपी सबावाला मुंबई के मेयर थे। वहीं, 1948 से 1949 तक डॉ एमयू मस्कारेन्हास और 1949 से 1952 तक एसके पाटिल मेयर थे। हम 1931 से मेयरों की लिस्ट देखें, तो हमें जेबी बोमन, एचएम रहीमतुल्लाह, वाईजे मेहर अली, एसपी सबावाला, ईए बंदूकवाला, एयूमेमन और एसकेपाटिल जैसे नाम मिलते हैं, जिनका मुंबई के विकास में इतिहास में अहम योगदान रहा है।

उत्तर भारतीय को मेयर बनाने की उठी थी मांग

इससे पहले बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह ने दावा किया था कि मुंबई का मेयर उत्तर भारतीय होगा। उन्होंनेे कहा था कि चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय नगरसेवक का निर्वाचन होगा कि महानगरपालिका में उत्तर भारतीय मेयर बनेगा। इस बयान का शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने हमला बोला था और बीजेपी पर मराठी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह मुंबई में गैर-मराठी मेयर बनाने के पक्ष में है, हालांकि कृपाशंकर सिंह अपने बयान से पलट गए और अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि मंबई का मेयर मराठी होगा। मेयर पद को लेकर मंत्री नितेश राणे का बयान काफी चर्चित हुआ था. उन्होंने दावा किया था कि ‘आई लव महादेव’ बोलने वाला ही मुंबई का मेयर बनेगा। राज्य की डेमोग्राफी में तेजी से बदलाव आ रहा है. उन्होंने सवाल किया कि ये ‘आई लव मोहम्मद’ बोलने वाले क्या पाकिस्तान के कराची या इस्लामाबाद में रहते हैं। यदि वे लोग ध्यान नहीं देंगे तो मुंबई में ‘आई लव मोहम्मद’ वाले को वे मेयर बना देंगे।

मुस्लिमको मेयर बनने की वारिस पठान की मांग

सीएम फडणवीस के मराठी-हिंदू मेयर बनने के बयान पर AIMIM नेता वारिस पठान ने पलटवार किया है। मुंबई के धारावी में चुनाव प्रचार के दौरान मुंबई मेयर पद को लेकर मचे बवाल के बीच वारिस पठान ने कहा कि एक दिन कलमा पढ़ने वाली मुस्लिम महिला मुंबई की महापौर बनेगी। AIMIM नेता ने कहा कि अगर मुसलमान राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश बन सकता है तो मुस्लिम महिला मेयर क्यों नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला मेयर क्यों नहीं बन सकती?

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