हेमंत शर्मा, इंदौर। वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। नगर निगम के बजट सत्र में उठे इस मुद्दे ने अब नेताओं के तीखे बयानों का रूप ले लिया और माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

पाकिस्तान की टिकट मैं करवा दूंगा, वे वहीं जाकर रहें

दरअसल, नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम गान को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। बीजेपी ने कांग्रेस की मुस्लिम पार्षदों- रुबीना इकबाल खान और फोजिया शेख अलीम-पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया। इस घटना के बाद से ही भाजपा लगातार इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठा रही है। इसी कड़ी में अब “सनातनी” छवि वाले विधायक गोलू शुक्ला ने भी एंट्री कर दी है और उन्होंने बेहद तीखे तेवर दिखाए हैं। गोलू शुक्ला ने साफ शब्दों में कहा-“भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा… और जो नहीं कहते, उनके लिए पाकिस्तान की टिकट मैं करवा दूंगा, वे वहीं जाकर रहें।”

शहरभर में बड़ा अभियान बना दिया

गोलू शुक्ला के इस बयान ने सियासी माहौल को और ज्यादा भड़का दिया है। उनके इस बयान को लेकर अब नए सिरे से बहस छिड़ गई है कि क्या देशभक्ति साबित करने के लिए किसी खास नारे को अनिवार्य करना सही है या नहीं। वहीं, बीजेपी ने इस मुद्दे को शहरभर में बड़ा अभियान बना दिया है। इंदौर के सभी 85 वार्डों में वंदे मातरम गान के आयोजन किए जा रहे हैं। इसके जरिए पार्टी इस मुद्दे को जनभावना से जोड़ने की कोशिश में जुटी है।

कांग्रेस के हर कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम से

दूसरी तरफ कांग्रेस भी बैकफुट पर नहीं दिख रही। कांग्रेस शहर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने पलटवार करते हुए अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि कांग्रेस के हर कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम से की जाए, ताकि बीजेपी के आरोपों को सीधे चुनौती दी जा सके। अब यह मामला सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे सियासी ध्रुवीकरण का मुद्दा बन चुका है।

बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा

एक तरफ राष्ट्रवाद के नाम पर बयानबाजी तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगे हैं। स्पष्ट है कि वंदे मातरम का यह विवाद फिलहाल थमने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में यह और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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